पंचांग 20 नवंबर 2027

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

20 नवंबर 2027 · शनिवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:43
सूर्यास्त17:56
चंद्रोदय00:07 (21 नव॰)
चंद्रास्त12:17
मास:
कार्तिक (अमांत) · मार्गशीर्ष (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1949 · विक्रम (चैत्रादि) 2084
संवत्सर:
प्लवंग (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
शरद · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
वृश्चिक
चंद्र राशि:
कर्क 23:07 तक, फिर सिंह

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
शनिवार
तिथि
कृष्ण सप्तमी 19:17 तक, फिर कृष्ण अष्टमी 17:20 (21 नव॰) तक
नक्षत्र
आश्लेषा 23:07 तक, फिर मघा 21:52 (21 नव॰) तक
योग
ब्रह्म 22:11 तक, फिर इन्द्र 19:25 (21 नव॰) तक
करण
विष्टि 08:18 तक, फिर बव 19:17 तक, फिर बालव 06:18 (21 नव॰) तक, फिर कौलव 17:20 (21 नव॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त11:57 – 12:42
  • राहु काल09:31 – 10:55
  • यमगंड13:44 – 15:08
  • गुलिक काल06:43 – 08:07

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • काल(वर्जित (परंपरा))06:43 – 08:07
  • शुभ(शुभ)08:07 – 09:31
  • रोग(वर्जित (परंपरा))09:31 – 10:55
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))10:55 – 12:19
  • चर(सामान्य)12:19 – 13:44
  • लाभ(शुभ)13:44 – 15:08
  • अमृत(शुभ)15:08 – 16:32
  • काल(वर्जित (परंपरा))16:32 – 17:56

रात

  • लाभ(शुभ)17:56 – 19:32
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))19:32 – 21:08
  • शुभ(शुभ)21:08 – 22:44
  • अमृत(शुभ)22:44 – 00:20 (21 नव॰)
  • चर(सामान्य)00:20 (21 नव॰) – 01:56 (21 नव॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))01:56 (21 नव॰) – 03:32 (21 नव॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))03:32 (21 नव॰) – 05:08 (21 नव॰)
  • लाभ(शुभ)05:08 (21 नव॰) – 06:44 (21 नव॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

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