पंचांग 1 मार्च 2028

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

1 मार्च 2028 · बुधवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:53
सूर्यास्त18:40
चंद्रोदय09:29
चंद्रास्त22:45
मास:
फाल्गुन (अमांत)
संवत:
शक 1949 · विक्रम (चैत्रादि) 2084
संवत्सर:
प्लवंग (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
शिशिर · उत्तरायण
सूर्य राशि:
कुंभ
चंद्र राशि:
मेष

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
बुधवार
तिथि
शुक्ल पंचमी 01:56 (2 मार्च) तक, फिर शुक्ल षष्ठी 02:38 (3 मार्च) तक
नक्षत्र
अश्विनी 17:53 तक, फिर भरणी 19:19 (2 मार्च) तक
योग
ब्रह्म 22:53 तक, फिर इन्द्र 22:21 (2 मार्च) तक
करण
बव 13:23 तक, फिर बालव 01:56 (2 मार्च) तक, फिर कौलव 14:22 (2 मार्च) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:23 – 13:10परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
  • राहु काल12:46 – 14:15
  • यमगंड08:21 – 09:50
  • गुलिक काल11:18 – 12:46

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • लाभ(शुभ)06:53 – 08:21
  • अमृत(शुभ)08:21 – 09:50
  • काल(वर्जित (परंपरा))09:50 – 11:18
  • शुभ(शुभ)11:18 – 12:46
  • रोग(वर्जित (परंपरा))12:46 – 14:15
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))14:15 – 15:43
  • चर(सामान्य)15:43 – 17:12
  • लाभ(शुभ)17:12 – 18:40

रात

  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))18:40 – 20:12
  • शुभ(शुभ)20:12 – 21:43
  • अमृत(शुभ)21:43 – 23:15
  • चर(सामान्य)23:15 – 00:46 (2 मार्च)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))00:46 (2 मार्च) – 02:18 (2 मार्च)
  • काल(वर्जित (परंपरा))02:18 (2 मार्च) – 03:49 (2 मार्च)
  • लाभ(शुभ)03:49 (2 मार्च) – 05:21 (2 मार्च)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))05:21 (2 मार्च) – 06:52 (2 मार्च)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

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