पंचांग 10 मार्च 2028

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

10 मार्च 2028 · शुक्रवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:46
सूर्यास्त18:43
चंद्रोदय18:08
चंद्रास्त06:37 (11 मार्च)
मास:
फाल्गुन (अमांत)
संवत:
शक 1949 · विक्रम (चैत्रादि) 2084
संवत्सर:
प्लवंग (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
शिशिर · उत्तरायण
सूर्य राशि:
कुंभ
चंद्र राशि:
सिंह

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
शुक्रवार
तिथि
शुक्ल चतुर्दशी 10:21 तक, फिर शुक्ल पूर्णिमा 06:36 (11 मार्च) तक, फिर कृष्ण प्रतिपदा 02:56 (12 मार्च) तक
नक्षत्र
मघा 09:28 तक, फिर पूर्वाफाल्गुनी 06:29 (11 मार्च) तक, फिर उत्तराफाल्गुनी 03:36 (12 मार्च) तक
योग
धृति 20:32 तक, फिर शूल 16:17 (11 मार्च) तक
करण
वणिज 10:21 तक, फिर विष्टि 20:28 तक, फिर बव 06:36 (11 मार्च) तक, फिर बालव 16:44 (11 मार्च) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:20 – 13:08
  • राहु काल11:15 – 12:44
  • यमगंड15:43 – 17:13
  • गुलिक काल08:16 – 09:45

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • चर(सामान्य)06:46 – 08:16
  • लाभ(शुभ)08:16 – 09:45
  • अमृत(शुभ)09:45 – 11:15
  • काल(वर्जित (परंपरा))11:15 – 12:44
  • शुभ(शुभ)12:44 – 14:14
  • रोग(वर्जित (परंपरा))14:14 – 15:43
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))15:43 – 17:13
  • चर(सामान्य)17:13 – 18:43

रात

  • रोग(वर्जित (परंपरा))18:43 – 20:13
  • काल(वर्जित (परंपरा))20:13 – 21:43
  • लाभ(शुभ)21:43 – 23:14
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))23:14 – 00:44 (11 मार्च)
  • शुभ(शुभ)00:44 (11 मार्च) – 02:14 (11 मार्च)
  • अमृत(शुभ)02:14 (11 मार्च) – 03:45 (11 मार्च)
  • चर(सामान्य)03:45 (11 मार्च) – 05:15 (11 मार्च)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))05:15 (11 मार्च) – 06:45 (11 मार्च)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

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