पंचांग 7 अप्रैल 2028
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
7 अप्रैल 2028 · शुक्रवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:23
सूर्यास्त18:49
चंद्रोदय16:50
चंद्रास्त05:09 (8 अप्रैल)
- मास:
- चैत्र (अमांत)
- संवत:
- शक 1950 · विक्रम (चैत्रादि) 2085
- संवत्सर:
- कीलक (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- वसंत · उत्तरायण
- सूर्य राशि:
- मीन
- चंद्र राशि:
- सिंह 22:19 तक, फिर कन्या
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- शुक्रवार
- तिथि
- शुक्ल त्रयोदशी 22:33 तक, फिर शुक्ल चतुर्दशी 19:11 (8 अप्रैल) तक
- नक्षत्र
- पूर्वाफाल्गुनी 16:57 तक, फिर उत्तराफाल्गुनी 14:23 (8 अप्रैल) तक
- योग
- वृद्धि 02:08 (8 अप्रैल) तक, फिर ध्रुव 22:14 (8 अप्रैल) तक
- करण
- कौलव 12:13 तक, फिर तैतिल 22:33 तक, फिर गर 08:52 (8 अप्रैल) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:11 – 13:01
- राहु काल11:03 – 12:36
- यमगंड15:43 – 17:16
- गुलिक काल07:57 – 09:30
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- चर(सामान्य)06:23 – 07:57
- लाभ(शुभ)07:57 – 09:30
- अमृत(शुभ)09:30 – 11:03
- काल(वर्जित (परंपरा))11:03 – 12:36
- शुभ(शुभ)12:36 – 14:09
- रोग(वर्जित (परंपरा))14:09 – 15:43
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))15:43 – 17:16
- चर(सामान्य)17:16 – 18:49
रात
- रोग(वर्जित (परंपरा))18:49 – 20:16
- काल(वर्जित (परंपरा))20:16 – 21:43
- लाभ(शुभ)21:43 – 23:09
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))23:09 – 00:36 (8 अप्रैल)
- शुभ(शुभ)00:36 (8 अप्रैल) – 02:02 (8 अप्रैल)
- अमृत(शुभ)02:02 (8 अप्रैल) – 03:29 (8 अप्रैल)
- चर(सामान्य)03:29 (8 अप्रैल) – 04:56 (8 अप्रैल)
- रोग(वर्जित (परंपरा))04:56 (8 अप्रैल) – 06:22 (8 अप्रैल)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
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