पंचांग 7 जुलाई 2028

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

7 जुलाई 2028 · शुक्रवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:03
सूर्यास्त19:15
चंद्रोदय19:50
चंद्रास्त06:21
मास:
आषाढ़ (अमांत) · श्रावण (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1950 · विक्रम (चैत्रादि) 2085
संवत्सर:
कीलक (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
ग्रीष्म · उत्तरायण
सूर्य राशि:
मिथुन
चंद्र राशि:
धनु 17:09 तक, फिर मकर

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
शुक्रवार
तिथि
कृष्ण प्रतिपदा 00:46 (8 जुल॰) तक, फिर कृष्ण द्वितीया 02:20 (9 जुल॰) तक
नक्षत्र
पूर्वाषाढ़ा 10:42 तक, फिर उत्तराषाढ़ा 12:39 (8 जुल॰) तक
योग
इन्द्र 08:16 तक, फिर वैधृति 08:18 (8 जुल॰) तक
करण
बालव 12:10 तक, फिर कौलव 00:46 (8 जुल॰) तक, फिर तैतिल 13:29 (8 जुल॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:13 – 13:05
  • राहु काल11:00 – 12:39
  • यमगंड15:57 – 17:36
  • गुलिक काल07:42 – 09:21

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • चर(सामान्य)06:03 – 07:42
  • लाभ(शुभ)07:42 – 09:21
  • अमृत(शुभ)09:21 – 11:00
  • काल(वर्जित (परंपरा))11:00 – 12:39
  • शुभ(शुभ)12:39 – 14:18
  • रोग(वर्जित (परंपरा))14:18 – 15:57
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))15:57 – 17:36
  • चर(सामान्य)17:36 – 19:15

रात

  • रोग(वर्जित (परंपरा))19:15 – 20:36
  • काल(वर्जित (परंपरा))20:36 – 21:57
  • लाभ(शुभ)21:57 – 23:18
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))23:18 – 00:39 (8 जुल॰)
  • शुभ(शुभ)00:39 (8 जुल॰) – 02:00 (8 जुल॰)
  • अमृत(शुभ)02:00 (8 जुल॰) – 03:21 (8 जुल॰)
  • चर(सामान्य)03:21 (8 जुल॰) – 04:42 (8 जुल॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))04:42 (8 जुल॰) – 06:04 (8 जुल॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

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