पंचांग 17 सितंबर 2028

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

17 सितंबर 2028 · रविवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:22
सूर्यास्त18:34
चंद्रोदय05:39 (18 सित॰)
चंद्रास्त17:22
मास:
भाद्रपद (अमांत) · आश्विन (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1950 · विक्रम (चैत्रादि) 2085
संवत्सर:
कीलक (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
वर्षा · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
कन्या
चंद्र राशि:
सिंह

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
रविवार
तिथि
कृष्ण त्रयोदशी 07:30 तक, फिर कृष्ण चतुर्दशी 03:47 (18 सित॰) तक, फिर कृष्ण अमावस्या 23:53 (18 सित॰) तक
नक्षत्र
मघा 18:25 तक, फिर पूर्वाफाल्गुनी 15:23 (18 सित॰) तक
योग
सिद्ध 12:07 तक, फिर साध्य 07:53 (18 सित॰) तक
करण
वणिज 07:30 तक, फिर विष्टि 17:40 तक, फिर शकुनि 03:47 (18 सित॰) तक, फिर चतुष्पद 13:51 (18 सित॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:04 – 12:53
  • राहु काल17:03 – 18:34
  • यमगंड12:28 – 14:00
  • गुलिक काल15:31 – 17:03

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))06:22 – 07:54
  • चर(सामान्य)07:54 – 09:25
  • लाभ(शुभ)09:25 – 10:57
  • अमृत(शुभ)10:57 – 12:28
  • काल(वर्जित (परंपरा))12:28 – 14:00
  • शुभ(शुभ)14:00 – 15:31
  • रोग(वर्जित (परंपरा))15:31 – 17:03
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))17:03 – 18:34

रात

  • शुभ(शुभ)18:34 – 20:03
  • अमृत(शुभ)20:03 – 21:31
  • चर(सामान्य)21:31 – 23:00
  • रोग(वर्जित (परंपरा))23:00 – 00:28 (18 सित॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))00:28 (18 सित॰) – 01:57 (18 सित॰)
  • लाभ(शुभ)01:57 (18 सित॰) – 03:25 (18 सित॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))03:25 (18 सित॰) – 04:54 (18 सित॰)
  • शुभ(शुभ)04:54 (18 सित॰) – 06:22 (18 सित॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

अपनी कुंडली देखें