पंचांग 10 दिसंबर 2028
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
10 दिसंबर 2028 · रविवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:56
सूर्यास्त17:58
चंद्रोदय01:58 (11 दिस॰)
चंद्रास्त13:10
- मास:
- मार्गशीर्ष (अमांत) · पौष (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1950 · विक्रम (चैत्रादि) 2085
- संवत्सर:
- कीलक (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- हेमंत · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- वृश्चिक
- चंद्र राशि:
- कन्या
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- रविवार
- तिथि
- कृष्ण नवमी 19:52 तक, फिर कृष्ण दशमी 17:33 (11 दिस॰) तक
- नक्षत्र
- उत्तराफाल्गुनी 15:10 तक, फिर हस्त 13:34 (11 दिस॰) तक
- योग
- आयुष्मान 23:39 तक, फिर सौभाग्य 20:32 (11 दिस॰) तक
- करण
- तैतिल 09:00 तक, फिर गर 19:52 तक, फिर वणिज 06:43 (11 दिस॰) तक, फिर विष्टि 17:33 (11 दिस॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:05 – 12:49
- राहु काल16:35 – 17:58
- यमगंड12:27 – 13:50
- गुलिक काल15:13 – 16:35
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))06:56 – 08:18
- चर(सामान्य)08:18 – 09:41
- लाभ(शुभ)09:41 – 11:04
- अमृत(शुभ)11:04 – 12:27
- काल(वर्जित (परंपरा))12:27 – 13:50
- शुभ(शुभ)13:50 – 15:13
- रोग(वर्जित (परंपरा))15:13 – 16:35
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))16:35 – 17:58
रात
- शुभ(शुभ)17:58 – 19:36
- अमृत(शुभ)19:36 – 21:13
- चर(सामान्य)21:13 – 22:50
- रोग(वर्जित (परंपरा))22:50 – 00:27 (11 दिस॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))00:27 (11 दिस॰) – 02:04 (11 दिस॰)
- लाभ(शुभ)02:04 (11 दिस॰) – 03:42 (11 दिस॰)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))03:42 (11 दिस॰) – 05:19 (11 दिस॰)
- शुभ(शुभ)05:19 (11 दिस॰) – 06:56 (11 दिस॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
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