पंचांग 12 दिसंबर 2028

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

12 दिसंबर 2028 · मंगलवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:57
सूर्यास्त17:59
चंद्रोदय03:59 (13 दिस॰)
चंद्रास्त14:38
मास:
मार्गशीर्ष (अमांत) · पौष (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1950 · विक्रम (चैत्रादि) 2085
संवत्सर:
कीलक (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
हेमंत · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
वृश्चिक
चंद्र राशि:
तुला

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
मंगलवार
तिथि
कृष्ण एकादशी 15:13 तक, फिर कृष्ण द्वादशी 12:56 (13 दिस॰) तक
नक्षत्र
चित्रा 11:55 तक, फिर स्वाती 10:19 (13 दिस॰) तक
योग
शोभन 17:25 तक, फिर अतिगण्ड 14:21 (13 दिस॰) तक
करण
बालव 15:13 तक, फिर कौलव 02:04 (13 दिस॰) तक, फिर तैतिल 12:56 (13 दिस॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:06 – 12:50
  • राहु काल15:13 – 16:36
  • यमगंड09:42 – 11:05
  • गुलिक काल12:28 – 13:51

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • रोग(वर्जित (परंपरा))06:57 – 08:20
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))08:20 – 09:42
  • चर(सामान्य)09:42 – 11:05
  • लाभ(शुभ)11:05 – 12:28
  • अमृत(शुभ)12:28 – 13:51
  • काल(वर्जित (परंपरा))13:51 – 15:13
  • शुभ(शुभ)15:13 – 16:36
  • रोग(वर्जित (परंपरा))16:36 – 17:59

रात

  • काल(वर्जित (परंपरा))17:59 – 19:36
  • लाभ(शुभ)19:36 – 21:14
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))21:14 – 22:51
  • शुभ(शुभ)22:51 – 00:28 (13 दिस॰)
  • अमृत(शुभ)00:28 (13 दिस॰) – 02:05 (13 दिस॰)
  • चर(सामान्य)02:05 (13 दिस॰) – 03:43 (13 दिस॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))03:43 (13 दिस॰) – 05:20 (13 दिस॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))05:20 (13 दिस॰) – 06:57 (13 दिस॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

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