पंचांग 15 मार्च 2029

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

15 मार्च 2029 · गुरुवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:42
सूर्यास्त18:44
चंद्रोदयनहीं
चंद्रास्त18:56
मास:
फाल्गुन (अमांत) · चैत्र (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1950 · विक्रम (चैत्रादि) 2085
संवत्सर:
कीलक (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
शिशिर · उत्तरायण
सूर्य राशि:
मीन
चंद्र राशि:
कुंभ 08:36 तक, फिर मीन

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
गुरुवार
तिथि
कृष्ण अमावस्या 09:49 तक, फिर शुक्ल प्रतिपदा 12:13 (16 मार्च) तक
नक्षत्र
पूर्वभाद्रपदा 15:19 तक, फिर उत्तरभाद्रपदा 18:14 (16 मार्च) तक
योग
शुभ 19:58 तक, फिर शुक्ल 20:49 (16 मार्च) तक
करण
नाग 09:49 तक, फिर किंस्तुघ्न 23:00 तक, फिर बव 12:13 (16 मार्च) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:19 – 13:07
  • राहु काल14:13 – 15:43
  • यमगंड06:42 – 08:12
  • गुलिक काल09:43 – 11:13

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • शुभ(शुभ)06:42 – 08:12
  • रोग(वर्जित (परंपरा))08:12 – 09:43
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))09:43 – 11:13
  • चर(सामान्य)11:13 – 12:43
  • लाभ(शुभ)12:43 – 14:13
  • अमृत(शुभ)14:13 – 15:43
  • काल(वर्जित (परंपरा))15:43 – 17:14
  • शुभ(शुभ)17:14 – 18:44

रात

  • अमृत(शुभ)18:44 – 20:14
  • चर(सामान्य)20:14 – 21:43
  • रोग(वर्जित (परंपरा))21:43 – 23:13
  • काल(वर्जित (परंपरा))23:13 – 00:43 (16 मार्च)
  • लाभ(शुभ)00:43 (16 मार्च) – 02:12 (16 मार्च)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))02:12 (16 मार्च) – 03:42 (16 मार्च)
  • शुभ(शुभ)03:42 (16 मार्च) – 05:12 (16 मार्च)
  • अमृत(शुभ)05:12 (16 मार्च) – 06:41 (16 मार्च)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

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