पंचांग 27 मार्च 2029

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

27 मार्च 2029 · मंगलवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:32
सूर्यास्त18:47
चंद्रोदय16:04
चंद्रास्त04:47 (28 मार्च)
मास:
अधिक चैत्र (अमांत)
संवत:
शक 1951 · विक्रम (चैत्रादि) 2086
संवत्सर:
सौम्य (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
वसंत · उत्तरायण
सूर्य राशि:
मीन
चंद्र राशि:
कर्क 07:34 तक, फिर सिंह

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
मंगलवार
तिथि
शुक्ल द्वादशी 18:53 तक, फिर शुक्ल त्रयोदशी 15:35 (28 मार्च) तक
नक्षत्र
आश्लेषा 07:34 तक, फिर मघा 05:19 (28 मार्च) तक, फिर पूर्वाफाल्गुनी 02:33 (29 मार्च) तक
योग
धृति 14:06 तक, फिर शूल 10:21 (28 मार्च) तक
करण
बव 08:20 तक, फिर बालव 18:53 तक, फिर कौलव 05:17 (28 मार्च) तक, फिर तैतिल 15:35 (28 मार्च) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:15 – 13:04
  • राहु काल15:43 – 17:15
  • यमगंड09:36 – 11:08
  • गुलिक काल12:40 – 14:11

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • रोग(वर्जित (परंपरा))06:32 – 08:04
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))08:04 – 09:36
  • चर(सामान्य)09:36 – 11:08
  • लाभ(शुभ)11:08 – 12:40
  • अमृत(शुभ)12:40 – 14:11
  • काल(वर्जित (परंपरा))14:11 – 15:43
  • शुभ(शुभ)15:43 – 17:15
  • रोग(वर्जित (परंपरा))17:15 – 18:47

रात

  • काल(वर्जित (परंपरा))18:47 – 20:15
  • लाभ(शुभ)20:15 – 21:43
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))21:43 – 23:11
  • शुभ(शुभ)23:11 – 00:39 (28 मार्च)
  • अमृत(शुभ)00:39 (28 मार्च) – 02:07 (28 मार्च)
  • चर(सामान्य)02:07 (28 मार्च) – 03:35 (28 मार्च)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))03:35 (28 मार्च) – 05:03 (28 मार्च)
  • काल(वर्जित (परंपरा))05:03 (28 मार्च) – 06:32 (28 मार्च)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

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