पंचांग 2 अप्रैल 2029
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
2 अप्रैल 2029 · सोमवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:27
सूर्यास्त18:48
चंद्रोदय22:28
चंद्रास्त08:48
- मास:
- अधिक चैत्र (अमांत) · वैशाख (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1951 · विक्रम (चैत्रादि) 2086
- संवत्सर:
- सौम्य (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- वसंत · उत्तरायण
- सूर्य राशि:
- मीन
- चंद्र राशि:
- तुला 06:39 तक, फिर वृश्चिक
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- सोमवार
- तिथि
- कृष्ण चतुर्थी 17:49 तक, फिर कृष्ण पंचमी 15:34 (3 अप्रैल) तक
- नक्षत्र
- विशाखा 12:08 तक, फिर अनुराधा 10:27 (3 अप्रैल) तक
- योग
- वज्र 09:15 तक, फिर सिद्धि 06:02 (3 अप्रैल) तक, फिर व्यतीपात 03:24 (4 अप्रैल) तक
- करण
- बव 07:12 तक, फिर बालव 17:49 तक, फिर कौलव 04:36 (3 अप्रैल) तक, फिर तैतिल 15:34 (3 अप्रैल) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:13 – 13:02
- राहु काल08:00 – 09:33
- यमगंड11:05 – 12:38
- गुलिक काल14:10 – 15:43
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- अमृत(शुभ)06:27 – 08:00
- काल(वर्जित (परंपरा))08:00 – 09:33
- शुभ(शुभ)09:33 – 11:05
- रोग(वर्जित (परंपरा))11:05 – 12:38
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))12:38 – 14:10
- चर(सामान्य)14:10 – 15:43
- लाभ(शुभ)15:43 – 17:15
- अमृत(शुभ)17:15 – 18:48
रात
- चर(सामान्य)18:48 – 20:15
- रोग(वर्जित (परंपरा))20:15 – 21:43
- काल(वर्जित (परंपरा))21:43 – 23:10
- लाभ(शुभ)23:10 – 00:37 (3 अप्रैल)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))00:37 (3 अप्रैल) – 02:05 (3 अप्रैल)
- शुभ(शुभ)02:05 (3 अप्रैल) – 03:32 (3 अप्रैल)
- अमृत(शुभ)03:32 (3 अप्रैल) – 04:59 (3 अप्रैल)
- चर(सामान्य)04:59 (3 अप्रैल) – 06:27 (3 अप्रैल)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
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