पंचांग 1 मई 2029

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

1 मई 2029 · मंगलवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:07
सूर्यास्त18:56
चंद्रोदय22:14
चंद्रास्त08:29
मास:
चैत्र (अमांत) · वैशाख (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1951 · विक्रम (चैत्रादि) 2086
संवत्सर:
सौम्य (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
वसंत · उत्तरायण
सूर्य राशि:
मेष
चंद्र राशि:
वृश्चिक 18:48 तक, फिर धनु

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
मंगलवार
तिथि
कृष्ण तृतीया 06:26 तक, फिर कृष्ण चतुर्थी 04:21 (2 मई) तक, फिर कृष्ण पंचमी 03:02 (3 मई) तक
नक्षत्र
ज्येष्ठा 18:48 तक, फिर मूल 17:54 (2 मई) तक
योग
परिघ 12:42 तक, फिर शिव 10:05 (2 मई) तक
करण
विष्टि 06:26 तक, फिर बव 17:18 तक, फिर बालव 04:21 (2 मई) तक, फिर कौलव 15:36 (2 मई) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:06 – 12:57
  • राहु काल15:43 – 17:20
  • यमगंड09:19 – 10:55
  • गुलिक काल12:31 – 14:07

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • रोग(वर्जित (परंपरा))06:07 – 07:43
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))07:43 – 09:19
  • चर(सामान्य)09:19 – 10:55
  • लाभ(शुभ)10:55 – 12:31
  • अमृत(शुभ)12:31 – 14:07
  • काल(वर्जित (परंपरा))14:07 – 15:43
  • शुभ(शुभ)15:43 – 17:20
  • रोग(वर्जित (परंपरा))17:20 – 18:56

रात

  • काल(वर्जित (परंपरा))18:56 – 20:20
  • लाभ(शुभ)20:20 – 21:43
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))21:43 – 23:07
  • शुभ(शुभ)23:07 – 00:31 (2 मई)
  • अमृत(शुभ)00:31 (2 मई) – 01:55 (2 मई)
  • चर(सामान्य)01:55 (2 मई) – 03:19 (2 मई)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))03:19 (2 मई) – 04:42 (2 मई)
  • काल(वर्जित (परंपरा))04:42 (2 मई) – 06:06 (2 मई)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

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