पंचांग 26 मई 2029
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
26 मई 2029 · शनिवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय05:58
सूर्यास्त19:05
चंद्रोदय17:44
चंद्रास्त05:10 (27 मई)
- मास:
- वैशाख (अमांत)
- संवत:
- शक 1951 · विक्रम (चैत्रादि) 2086
- संवत्सर:
- सौम्य (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- वसंत · उत्तरायण
- सूर्य राशि:
- वृषभ
- चंद्र राशि:
- तुला 03:49 (27 मई) तक, फिर वृश्चिक
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- शनिवार
- तिथि
- शुक्ल त्रयोदशी 06:34 तक, फिर शुक्ल चतुर्दशी 03:15 (27 मई) तक, फिर शुक्ल पूर्णिमा 00:07 (28 मई) तक
- नक्षत्र
- स्वाती 11:42 तक, फिर विशाखा 09:13 (27 मई) तक
- योग
- वरीयान 10:09 तक, फिर परिघ 06:21 (27 मई) तक
- करण
- तैतिल 06:34 तक, फिर गर 16:54 तक, फिर वणिज 03:15 (27 मई) तक, फिर विष्टि 13:39 (27 मई) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:05 – 12:57
- राहु काल09:14 – 10:53
- यमगंड14:10 – 15:48
- गुलिक काल05:58 – 07:36
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- काल(वर्जित (परंपरा))05:58 – 07:36
- शुभ(शुभ)07:36 – 09:14
- रोग(वर्जित (परंपरा))09:14 – 10:53
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))10:53 – 12:31
- चर(सामान्य)12:31 – 14:10
- लाभ(शुभ)14:10 – 15:48
- अमृत(शुभ)15:48 – 17:26
- काल(वर्जित (परंपरा))17:26 – 19:05
रात
- लाभ(शुभ)19:05 – 20:26
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))20:26 – 21:48
- शुभ(शुभ)21:48 – 23:10
- अमृत(शुभ)23:10 – 00:31 (27 मई)
- चर(सामान्य)00:31 (27 मई) – 01:53 (27 मई)
- रोग(वर्जित (परंपरा))01:53 (27 मई) – 03:14 (27 मई)
- काल(वर्जित (परंपरा))03:14 (27 मई) – 04:36 (27 मई)
- लाभ(शुभ)04:36 (27 मई) – 05:57 (27 मई)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
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