पंचांग 2 सितंबर 2029
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
2 सितंबर 2029 · रविवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:20
सूर्यास्त18:48
चंद्रोदय01:08 (3 सित॰)
चंद्रास्त13:51
- मास:
- श्रावण (अमांत) · भाद्रपद (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1951 · विक्रम (चैत्रादि) 2086
- संवत्सर:
- सौम्य (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- वर्षा · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- सिंह
- चंद्र राशि:
- वृषभ 15:59 तक, फिर मिथुन
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- रविवार
- तिथि
- कृष्ण नवमी 00:17 (3 सित॰) तक, फिर कृष्ण दशमी 00:51 (4 सित॰) तक
- नक्षत्र
- मृगशीर्ष 04:48 (3 सित॰) तक, फिर आर्द्रा 05:52 (4 सित॰) तक
- योग
- वज्र 23:12 तक, फिर सिद्धि 22:40 (3 सित॰) तक
- करण
- तैतिल 11:42 तक, फिर गर 00:17 (3 सित॰) तक, फिर वणिज 12:40 (3 सित॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:09 – 12:58
- राहु काल17:14 – 18:48
- यमगंड12:34 – 14:07
- गुलिक काल15:41 – 17:14
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))06:20 – 07:53
- चर(सामान्य)07:53 – 09:27
- लाभ(शुभ)09:27 – 11:00
- अमृत(शुभ)11:00 – 12:34
- काल(वर्जित (परंपरा))12:34 – 14:07
- शुभ(शुभ)14:07 – 15:41
- रोग(वर्जित (परंपरा))15:41 – 17:14
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))17:14 – 18:48
रात
- शुभ(शुभ)18:48 – 20:14
- अमृत(शुभ)20:14 – 21:41
- चर(सामान्य)21:41 – 23:07
- रोग(वर्जित (परंपरा))23:07 – 00:34 (3 सित॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))00:34 (3 सित॰) – 02:00 (3 सित॰)
- लाभ(शुभ)02:00 (3 सित॰) – 03:27 (3 सित॰)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))03:27 (3 सित॰) – 04:53 (3 सित॰)
- शुभ(शुभ)04:53 (3 सित॰) – 06:20 (3 सित॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
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