पंचांग 7 सितंबर 2029
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
7 सितंबर 2029 · शुक्रवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:21
सूर्यास्त18:43
चंद्रोदय05:59 (8 सित॰)
चंद्रास्त17:46
- मास:
- श्रावण (अमांत) · भाद्रपद (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1951 · विक्रम (चैत्रादि) 2086
- संवत्सर:
- सौम्य (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- वर्षा · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- सिंह
- चंद्र राशि:
- सिंह
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- शुक्रवार
- तिथि
- कृष्ण चतुर्दशी 19:12 तक, फिर कृष्ण अमावस्या 16:14 (8 सित॰) तक
- नक्षत्र
- मघा 02:25 (8 सित॰) तक, फिर पूर्वाफाल्गुनी 00:07 (9 सित॰) तक
- योग
- शिव 14:11 तक, फिर सिद्ध 10:45 (8 सित॰) तक
- करण
- विष्टि 08:31 तक, फिर शकुनि 19:12 तक, फिर चतुष्पद 05:46 (8 सित॰) तक, फिर नाग 16:14 (8 सित॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:07 – 12:57
- राहु काल10:59 – 12:32
- यमगंड15:38 – 17:10
- गुलिक काल07:53 – 09:26
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- चर(सामान्य)06:21 – 07:53
- लाभ(शुभ)07:53 – 09:26
- अमृत(शुभ)09:26 – 10:59
- काल(वर्जित (परंपरा))10:59 – 12:32
- शुभ(शुभ)12:32 – 14:05
- रोग(वर्जित (परंपरा))14:05 – 15:38
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))15:38 – 17:10
- चर(सामान्य)17:10 – 18:43
रात
- रोग(वर्जित (परंपरा))18:43 – 20:10
- काल(वर्जित (परंपरा))20:10 – 21:38
- लाभ(शुभ)21:38 – 23:05
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))23:05 – 00:32 (8 सित॰)
- शुभ(शुभ)00:32 (8 सित॰) – 01:59 (8 सित॰)
- अमृत(शुभ)01:59 (8 सित॰) – 03:26 (8 सित॰)
- चर(सामान्य)03:26 (8 सित॰) – 04:54 (8 सित॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))04:54 (8 सित॰) – 06:21 (8 सित॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
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