पंचांग 24 सितंबर 2029

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

24 सितंबर 2029 · सोमवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:23
सूर्यास्त18:29
चंद्रोदय19:19
चंद्रास्त07:30
मास:
भाद्रपद (अमांत) · आश्विन (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1951 · विक्रम (चैत्रादि) 2086
संवत्सर:
सौम्य (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
वर्षा · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
कन्या
चंद्र राशि:
मीन 22:37 तक, फिर मेष

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
सोमवार
तिथि
कृष्ण द्वितीया 02:16 (25 सित॰) तक, फिर कृष्ण तृतीया 04:45 (26 सित॰) तक
नक्षत्र
रेवती 22:37 तक, फिर अश्विनी 01:36 (26 सित॰) तक
योग
ध्रुव 02:59 (25 सित॰) तक, फिर व्याघात 03:55 (26 सित॰) तक
करण
तैतिल 13:05 तक, फिर गर 02:16 (25 सित॰) तक, फिर वणिज 15:29 (25 सित॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:02 – 12:50
  • राहु काल07:54 – 09:25
  • यमगंड10:55 – 12:26
  • गुलिक काल13:57 – 15:27

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • अमृत(शुभ)06:23 – 07:54
  • काल(वर्जित (परंपरा))07:54 – 09:25
  • शुभ(शुभ)09:25 – 10:55
  • रोग(वर्जित (परंपरा))10:55 – 12:26
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))12:26 – 13:57
  • चर(सामान्य)13:57 – 15:27
  • लाभ(शुभ)15:27 – 16:58
  • अमृत(शुभ)16:58 – 18:29

रात

  • चर(सामान्य)18:29 – 19:58
  • रोग(वर्जित (परंपरा))19:58 – 21:27
  • काल(वर्जित (परंपरा))21:27 – 22:57
  • लाभ(शुभ)22:57 – 00:26 (25 सित॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))00:26 (25 सित॰) – 01:55 (25 सित॰)
  • शुभ(शुभ)01:55 (25 सित॰) – 03:25 (25 सित॰)
  • अमृत(शुभ)03:25 (25 सित॰) – 04:54 (25 सित॰)
  • चर(सामान्य)04:54 (25 सित॰) – 06:23 (25 सित॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

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