पंचांग 30 सितंबर 2029

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

30 सितंबर 2029 · रविवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:24
सूर्यास्त18:23
चंद्रोदय23:52
चंद्रास्त12:33
मास:
भाद्रपद (अमांत) · आश्विन (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1951 · विक्रम (चैत्रादि) 2086
संवत्सर:
सौम्य (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
वर्षा · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
कन्या
चंद्र राशि:
मिथुन

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
रविवार
तिथि
कृष्ण सप्तमी 13:49 तक, फिर कृष्ण अष्टमी 14:53 (1 अक्टू॰) तक
नक्षत्र
मृगशीर्ष 12:48 तक, फिर आर्द्रा 14:29 (1 अक्टू॰) तक
योग
व्यतीपात 07:06 तक, फिर वरीयान 07:04 (1 अक्टू॰) तक
करण
बव 13:49 तक, फिर बालव 02:26 (1 अक्टू॰) तक, फिर कौलव 14:53 (1 अक्टू॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:00 – 12:48
  • राहु काल16:53 – 18:23
  • यमगंड12:24 – 13:54
  • गुलिक काल15:24 – 16:53

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))06:24 – 07:54
  • चर(सामान्य)07:54 – 09:24
  • लाभ(शुभ)09:24 – 10:54
  • अमृत(शुभ)10:54 – 12:24
  • काल(वर्जित (परंपरा))12:24 – 13:54
  • शुभ(शुभ)13:54 – 15:24
  • रोग(वर्जित (परंपरा))15:24 – 16:53
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))16:53 – 18:23

रात

  • शुभ(शुभ)18:23 – 19:54
  • अमृत(शुभ)19:54 – 21:24
  • चर(सामान्य)21:24 – 22:54
  • रोग(वर्जित (परंपरा))22:54 – 00:24 (1 अक्टू॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))00:24 (1 अक्टू॰) – 01:54 (1 अक्टू॰)
  • लाभ(शुभ)01:54 (1 अक्टू॰) – 03:24 (1 अक्टू॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))03:24 (1 अक्टू॰) – 04:54 (1 अक्टू॰)
  • शुभ(शुभ)04:54 (1 अक्टू॰) – 06:25 (1 अक्टू॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

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