पंचांग 24 अक्टूबर 2029
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
24 अक्टूबर 2029 · बुधवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:31
सूर्यास्त18:06
चंद्रोदय19:19
चंद्रास्त07:56
- मास:
- आश्विन (अमांत) · कार्तिक (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1951 · विक्रम (चैत्रादि) 2086
- संवत्सर:
- सौम्य (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- शरद · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- तुला
- चंद्र राशि:
- मेष 17:39 तक, फिर वृषभ
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- बुधवार
- तिथि
- कृष्ण द्वितीया 20:04 तक, फिर कृष्ण तृतीया 22:34 (25 अक्टू॰) तक
- नक्षत्र
- भरणी 10:53 तक, फिर कृत्तिका 13:54 (25 अक्टू॰) तक
- योग
- सिद्धि 10:37 तक, फिर व्यतीपात 11:32 (25 अक्टू॰) तक
- करण
- तैतिल 06:47 तक, फिर गर 20:04 तक, फिर वणिज 09:20 (25 अक्टू॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त11:55 – 12:41परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
- राहु काल12:18 – 13:45
- यमगंड07:58 – 09:24
- गुलिक काल10:51 – 12:18
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- लाभ(शुभ)06:31 – 07:58
- अमृत(शुभ)07:58 – 09:24
- काल(वर्जित (परंपरा))09:24 – 10:51
- शुभ(शुभ)10:51 – 12:18
- रोग(वर्जित (परंपरा))12:18 – 13:45
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))13:45 – 15:12
- चर(सामान्य)15:12 – 16:39
- लाभ(शुभ)16:39 – 18:06
रात
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))18:06 – 19:39
- शुभ(शुभ)19:39 – 21:12
- अमृत(शुभ)21:12 – 22:45
- चर(सामान्य)22:45 – 00:18 (25 अक्टू॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))00:18 (25 अक्टू॰) – 01:51 (25 अक्टू॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))01:51 (25 अक्टू॰) – 03:25 (25 अक्टू॰)
- लाभ(शुभ)03:25 (25 अक्टू॰) – 04:58 (25 अक्टू॰)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))04:58 (25 अक्टू॰) – 06:31 (25 अक्टू॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
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