पंचांग 4 नवंबर 2029
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
4 नवंबर 2029 · रविवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:35
सूर्यास्त18:00
चंद्रोदय05:26 (5 नव॰)
चंद्रास्त16:20
- मास:
- आश्विन (अमांत) · कार्तिक (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1951 · विक्रम (चैत्रादि) 2086
- संवत्सर:
- सौम्य (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- शरद · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- तुला
- चंद्र राशि:
- कन्या 02:51 (5 नव॰) तक, फिर तुला
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- रविवार
- तिथि
- कृष्ण त्रयोदशी 17:30 तक, फिर कृष्ण चतुर्दशी 13:45 (5 नव॰) तक
- नक्षत्र
- हस्त 16:19 तक, फिर चित्रा 13:21 (5 नव॰) तक
- योग
- विष्कम्भ 19:15 तक, फिर प्रीति 14:57 (5 नव॰) तक
- करण
- गर 07:16 तक, फिर वणिज 17:30 तक, फिर विष्टि 03:39 (5 नव॰) तक, फिर शकुनि 13:45 (5 नव॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त11:55 – 12:40
- राहु काल16:34 – 18:00
- यमगंड12:18 – 13:43
- गुलिक काल15:09 – 16:34
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))06:35 – 08:01
- चर(सामान्य)08:01 – 09:26
- लाभ(शुभ)09:26 – 10:52
- अमृत(शुभ)10:52 – 12:18
- काल(वर्जित (परंपरा))12:18 – 13:43
- शुभ(शुभ)13:43 – 15:09
- रोग(वर्जित (परंपरा))15:09 – 16:34
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))16:34 – 18:00
रात
- शुभ(शुभ)18:00 – 19:34
- अमृत(शुभ)19:34 – 21:09
- चर(सामान्य)21:09 – 22:43
- रोग(वर्जित (परंपरा))22:43 – 00:18 (5 नव॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))00:18 (5 नव॰) – 01:52 (5 नव॰)
- लाभ(शुभ)01:52 (5 नव॰) – 03:27 (5 नव॰)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))03:27 (5 नव॰) – 05:01 (5 नव॰)
- शुभ(शुभ)05:01 (5 नव॰) – 06:36 (5 नव॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
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