पंचांग 4 दिसंबर 2029
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
4 दिसंबर 2029 · मंगलवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:52
सूर्यास्त17:57
चंद्रोदय06:22 (5 दिस॰)
चंद्रास्त16:42
- मास:
- कार्तिक (अमांत) · मार्गशीर्ष (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1951 · विक्रम (चैत्रादि) 2086
- संवत्सर:
- सौम्य (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- शरद · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- वृश्चिक
- चंद्र राशि:
- तुला 13:15 तक, फिर वृश्चिक
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- मंगलवार
- तिथि
- कृष्ण चतुर्दशी 23:46 तक, फिर कृष्ण अमावस्या 20:22 (5 दिस॰) तक
- नक्षत्र
- विशाखा 18:34 तक, फिर अनुराधा 15:51 (5 दिस॰) तक
- योग
- अतिगण्ड 15:59 तक, फिर सुकर्मा 11:55 (5 दिस॰) तक
- करण
- विष्टि 13:31 तक, फिर शकुनि 23:46 तक, फिर चतुष्पद 10:03 (5 दिस॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:02 – 12:46
- राहु काल15:10 – 16:34
- यमगंड09:38 – 11:01
- गुलिक काल12:24 – 13:47
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- रोग(वर्जित (परंपरा))06:52 – 08:15
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))08:15 – 09:38
- चर(सामान्य)09:38 – 11:01
- लाभ(शुभ)11:01 – 12:24
- अमृत(शुभ)12:24 – 13:47
- काल(वर्जित (परंपरा))13:47 – 15:10
- शुभ(शुभ)15:10 – 16:34
- रोग(वर्जित (परंपरा))16:34 – 17:57
रात
- काल(वर्जित (परंपरा))17:57 – 19:34
- लाभ(शुभ)19:34 – 21:11
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))21:11 – 22:48
- शुभ(शुभ)22:48 – 00:25 (5 दिस॰)
- अमृत(शुभ)00:25 (5 दिस॰) – 02:02 (5 दिस॰)
- चर(सामान्य)02:02 (5 दिस॰) – 03:38 (5 दिस॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))03:38 (5 दिस॰) – 05:15 (5 दिस॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))05:15 (5 दिस॰) – 06:52 (5 दिस॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
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