पंचांग 5 फ़रवरी 2030

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

5 फ़रवरी 2030 · मंगलवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय07:06
सूर्यास्त18:30
चंद्रोदय08:36
चंद्रास्त20:59
मास:
माघ (अमांत)
संवत:
शक 1951 · विक्रम (चैत्रादि) 2086
संवत्सर:
सौम्य (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
शिशिर · उत्तरायण
सूर्य राशि:
मकर
चंद्र राशि:
कुंभ 23:24 तक, फिर मीन

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
मंगलवार
तिथि
शुक्ल तृतीया 20:43 तक, फिर शुक्ल चतुर्थी 21:41 (6 फ़र॰) तक
नक्षत्र
पूर्वभाद्रपदा 05:44 (6 फ़र॰) तक, फिर उत्तरभाद्रपदा 07:28 (7 फ़र॰) तक
योग
परिघ 07:07 तक, फिर शिव 06:23 (6 फ़र॰) तक, फिर सिद्ध 06:11 (7 फ़र॰) तक
करण
तैतिल 08:29 तक, फिर गर 20:43 तक, फिर वणिज 09:07 (6 फ़र॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:25 – 13:11
  • राहु काल15:39 – 17:04
  • यमगंड09:57 – 11:23
  • गुलिक काल12:48 – 14:14

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • रोग(वर्जित (परंपरा))07:06 – 08:32
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))08:32 – 09:57
  • चर(सामान्य)09:57 – 11:23
  • लाभ(शुभ)11:23 – 12:48
  • अमृत(शुभ)12:48 – 14:14
  • काल(वर्जित (परंपरा))14:14 – 15:39
  • शुभ(शुभ)15:39 – 17:04
  • रोग(वर्जित (परंपरा))17:04 – 18:30

रात

  • काल(वर्जित (परंपरा))18:30 – 20:04
  • लाभ(शुभ)20:04 – 21:39
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))21:39 – 23:13
  • शुभ(शुभ)23:13 – 00:48 (6 फ़र॰)
  • अमृत(शुभ)00:48 (6 फ़र॰) – 02:22 (6 फ़र॰)
  • चर(सामान्य)02:22 (6 फ़र॰) – 03:57 (6 फ़र॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))03:57 (6 फ़र॰) – 05:31 (6 फ़र॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))05:31 (6 फ़र॰) – 07:06 (6 फ़र॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

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