पंचांग 29 मार्च 2030

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

29 मार्च 2030 · शुक्रवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:31
सूर्यास्त18:47
चंद्रोदय03:53 (30 मार्च)
चंद्रास्त14:58
मास:
फाल्गुन (अमांत) · चैत्र (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1951 · विक्रम (चैत्रादि) 2086
संवत्सर:
सौम्य (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
शिशिर · उत्तरायण
सूर्य राशि:
मीन
चंद्र राशि:
मकर 06:23 (30 मार्च) तक, फिर कुंभ

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
शुक्रवार
तिथि
कृष्ण एकादशी 00:34 (30 मार्च) तक, फिर कृष्ण द्वादशी 00:42 (31 मार्च) तक
नक्षत्र
श्रवण 18:06 तक, फिर धनिष्ठा 18:46 (30 मार्च) तक
योग
सिद्ध 21:40 तक, फिर साध्य 20:37 (30 मार्च) तक
करण
बव 12:39 तक, फिर बालव 00:34 (30 मार्च) तक, फिर कौलव 12:35 (30 मार्च) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:14 – 13:04
  • राहु काल11:07 – 12:39
  • यमगंड15:43 – 17:15
  • गुलिक काल08:03 – 09:35

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • चर(सामान्य)06:31 – 08:03
  • लाभ(शुभ)08:03 – 09:35
  • अमृत(शुभ)09:35 – 11:07
  • काल(वर्जित (परंपरा))11:07 – 12:39
  • शुभ(शुभ)12:39 – 14:11
  • रोग(वर्जित (परंपरा))14:11 – 15:43
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))15:43 – 17:15
  • चर(सामान्य)17:15 – 18:47

रात

  • रोग(वर्जित (परंपरा))18:47 – 20:15
  • काल(वर्जित (परंपरा))20:15 – 21:43
  • लाभ(शुभ)21:43 – 23:11
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))23:11 – 00:39 (30 मार्च)
  • शुभ(शुभ)00:39 (30 मार्च) – 02:06 (30 मार्च)
  • अमृत(शुभ)02:06 (30 मार्च) – 03:34 (30 मार्च)
  • चर(सामान्य)03:34 (30 मार्च) – 05:02 (30 मार्च)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))05:02 (30 मार्च) – 06:30 (30 मार्च)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

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