पंचांग 11 अप्रैल 2030

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

11 अप्रैल 2030 · गुरुवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:21
सूर्यास्त18:50
चंद्रोदय12:29
चंद्रास्त01:43 (12 अप्रैल)
मास:
चैत्र (अमांत)
संवत:
शक 1952 · विक्रम (चैत्रादि) 2087
संवत्सर:
साधारण (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
वसंत · उत्तरायण
सूर्य राशि:
मीन
चंद्र राशि:
मिथुन 14:16 तक, फिर कर्क

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
गुरुवार
तिथि
शुक्ल अष्टमी 21:01 तक, फिर शुक्ल नवमी 21:33 (12 अप्रैल) तक
नक्षत्र
पुनर्वसु 20:41 तक, फिर पुष्य 21:51 (12 अप्रैल) तक
योग
सुकर्मा 01:07 (12 अप्रैल) तक, फिर धृति 00:23 (13 अप्रैल) तक
करण
विष्टि 08:26 तक, फिर बव 21:01 तक, फिर बालव 09:24 (12 अप्रैल) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:10 – 13:00
  • राहु काल14:09 – 15:43
  • यमगंड06:21 – 07:54
  • गुलिक काल09:28 – 11:02

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • शुभ(शुभ)06:21 – 07:54
  • रोग(वर्जित (परंपरा))07:54 – 09:28
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))09:28 – 11:02
  • चर(सामान्य)11:02 – 12:35
  • लाभ(शुभ)12:35 – 14:09
  • अमृत(शुभ)14:09 – 15:43
  • काल(वर्जित (परंपरा))15:43 – 17:16
  • शुभ(शुभ)17:16 – 18:50

रात

  • अमृत(शुभ)18:50 – 20:16
  • चर(सामान्य)20:16 – 21:42
  • रोग(वर्जित (परंपरा))21:42 – 23:09
  • काल(वर्जित (परंपरा))23:09 – 00:35 (12 अप्रैल)
  • लाभ(शुभ)00:35 (12 अप्रैल) – 02:01 (12 अप्रैल)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))02:01 (12 अप्रैल) – 03:27 (12 अप्रैल)
  • शुभ(शुभ)03:27 (12 अप्रैल) – 04:54 (12 अप्रैल)
  • अमृत(शुभ)04:54 (12 अप्रैल) – 06:20 (12 अप्रैल)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

अपनी कुंडली देखें