पंचांग 3 सितंबर 2030

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

3 सितंबर 2030 · मंगलवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:20
सूर्यास्त18:47
चंद्रोदय11:15
चंद्रास्त22:44
मास:
भाद्रपद (अमांत)
संवत:
शक 1952 · विक्रम (चैत्रादि) 2087
संवत्सर:
साधारण (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
वर्षा · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
सिंह
चंद्र राशि:
तुला 20:36 तक, फिर वृश्चिक

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
मंगलवार
तिथि
शुक्ल षष्ठी 18:33 तक, फिर शुक्ल सप्तमी 16:28 (4 सित॰) तक
नक्षत्र
विशाखा 02:16 (4 सित॰) तक, फिर अनुराधा 00:56 (5 सित॰) तक
योग
इन्द्र 20:15 तक, फिर वैधृति 17:28 (4 सित॰) तक
करण
कौलव 07:36 तक, फिर तैतिल 18:33 तक, फिर गर 05:31 (4 सित॰) तक, फिर वणिज 16:28 (4 सित॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:08 – 12:58
  • राहु काल15:40 – 17:14
  • यमगंड09:27 – 11:00
  • गुलिक काल12:33 – 14:07

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • रोग(वर्जित (परंपरा))06:20 – 07:53
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))07:53 – 09:27
  • चर(सामान्य)09:27 – 11:00
  • लाभ(शुभ)11:00 – 12:33
  • अमृत(शुभ)12:33 – 14:07
  • काल(वर्जित (परंपरा))14:07 – 15:40
  • शुभ(शुभ)15:40 – 17:14
  • रोग(वर्जित (परंपरा))17:14 – 18:47

रात

  • काल(वर्जित (परंपरा))18:47 – 20:14
  • लाभ(शुभ)20:14 – 21:40
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))21:40 – 23:07
  • शुभ(शुभ)23:07 – 00:33 (4 सित॰)
  • अमृत(शुभ)00:33 (4 सित॰) – 02:00 (4 सित॰)
  • चर(सामान्य)02:00 (4 सित॰) – 03:27 (4 सित॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))03:27 (4 सित॰) – 04:53 (4 सित॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))04:53 (4 सित॰) – 06:20 (4 सित॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

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