पंचांग 20 जनवरी 2031

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

20 जनवरी 2031 · सोमवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय07:09
सूर्यास्त18:21
चंद्रोदय05:04 (21 जन॰)
चंद्रास्त15:27
मास:
पौष (अमांत) · माघ (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1952 · विक्रम (चैत्रादि) 2087
संवत्सर:
साधारण (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
हेमंत · उत्तरायण
सूर्य राशि:
मकर
चंद्र राशि:
वृश्चिक 20:11 तक, फिर धनु

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
सोमवार
तिथि
कृष्ण द्वादशी 20:15 तक, फिर कृष्ण त्रयोदशी 16:55 (21 जन॰) तक
नक्षत्र
ज्येष्ठा 20:11 तक, फिर मूल 17:35 (21 जन॰) तक
योग
ध्रुव 02:10 (21 जन॰) तक, फिर व्याघात 22:09 (21 जन॰) तक
करण
कौलव 09:50 तक, फिर तैतिल 20:15 तक, फिर गर 06:37 (21 जन॰) तक, फिर वणिज 16:55 (21 जन॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:23 – 13:07
  • राहु काल08:33 – 09:57
  • यमगंड11:21 – 12:45
  • गुलिक काल14:09 – 15:33

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • अमृत(शुभ)07:09 – 08:33
  • काल(वर्जित (परंपरा))08:33 – 09:57
  • शुभ(शुभ)09:57 – 11:21
  • रोग(वर्जित (परंपरा))11:21 – 12:45
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))12:45 – 14:09
  • चर(सामान्य)14:09 – 15:33
  • लाभ(शुभ)15:33 – 16:57
  • अमृत(शुभ)16:57 – 18:21

रात

  • चर(सामान्य)18:21 – 19:57
  • रोग(वर्जित (परंपरा))19:57 – 21:33
  • काल(वर्जित (परंपरा))21:33 – 23:09
  • लाभ(शुभ)23:09 – 00:45 (21 जन॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))00:45 (21 जन॰) – 02:21 (21 जन॰)
  • शुभ(शुभ)02:21 (21 जन॰) – 03:57 (21 जन॰)
  • अमृत(शुभ)03:57 (21 जन॰) – 05:33 (21 जन॰)
  • चर(सामान्य)05:33 (21 जन॰) – 07:09 (21 जन॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

अपनी कुंडली देखें