पंचांग 26 मार्च 2031
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
26 मार्च 2031 · बुधवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:34
सूर्यास्त18:46
चंद्रोदय08:31
चंद्रास्त21:44
- मास:
- चैत्र (अमांत)
- संवत:
- शक 1953 · विक्रम (चैत्रादि) 2088
- संवत्सर:
- विरोधकृत (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- वसंत · उत्तरायण
- सूर्य राशि:
- मीन
- चंद्र राशि:
- मेष
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- बुधवार
- तिथि
- शुक्ल तृतीया 08:53 तक, फिर शुक्ल चतुर्थी 10:05 (27 मार्च) तक
- नक्षत्र
- भरणी 03:32 (27 मार्च) तक, फिर कृत्तिका 05:45 (28 मार्च) तक
- योग
- वैधृति 12:29 तक, फिर विष्कम्भ 12:25 (27 मार्च) तक
- करण
- गर 08:53 तक, फिर वणिज 21:24 तक, फिर विष्टि 10:05 (27 मार्च) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:16 – 13:04परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
- राहु काल12:40 – 14:12
- यमगंड08:05 – 09:37
- गुलिक काल11:08 – 12:40
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- लाभ(शुभ)06:34 – 08:05
- अमृत(शुभ)08:05 – 09:37
- काल(वर्जित (परंपरा))09:37 – 11:08
- शुभ(शुभ)11:08 – 12:40
- रोग(वर्जित (परंपरा))12:40 – 14:12
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))14:12 – 15:43
- चर(सामान्य)15:43 – 17:15
- लाभ(शुभ)17:15 – 18:46
रात
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))18:46 – 20:15
- शुभ(शुभ)20:15 – 21:43
- अमृत(शुभ)21:43 – 23:11
- चर(सामान्य)23:11 – 00:40 (27 मार्च)
- रोग(वर्जित (परंपरा))00:40 (27 मार्च) – 02:08 (27 मार्च)
- काल(वर्जित (परंपरा))02:08 (27 मार्च) – 03:36 (27 मार्च)
- लाभ(शुभ)03:36 (27 मार्च) – 05:05 (27 मार्च)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))05:05 (27 मार्च) – 06:33 (27 मार्च)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
अपनी कुंडली देखें