पंचांग 11 जुलाई 2031

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

11 जुलाई 2031 · शुक्रवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:04
सूर्यास्त19:15
चंद्रोदय00:21 (12 जुल॰)
चंद्रास्त12:25
मास:
आषाढ़ (अमांत) · श्रावण (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1953 · विक्रम (चैत्रादि) 2088
संवत्सर:
विरोधकृत (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
ग्रीष्म · उत्तरायण
सूर्य राशि:
मिथुन
चंद्र राशि:
मीन 03:10 (12 जुल॰) तक, फिर मेष

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
शुक्रवार
तिथि
कृष्ण अष्टमी 05:25 (12 जुल॰) तक, फिर कृष्ण नवमी 06:09 (13 जुल॰) तक
नक्षत्र
रेवती 03:10 (12 जुल॰) तक, फिर अश्विनी 04:32 (13 जुल॰) तक
योग
अतिगण्ड 18:19 तक, फिर सुकर्मा 17:39 (12 जुल॰) तक
करण
बालव 17:19 तक, फिर कौलव 05:25 (12 जुल॰) तक, फिर तैतिल 17:41 (12 जुल॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:13 – 13:06
  • राहु काल11:01 – 12:40
  • यमगंड15:57 – 17:36
  • गुलिक काल07:43 – 09:22

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • चर(सामान्य)06:04 – 07:43
  • लाभ(शुभ)07:43 – 09:22
  • अमृत(शुभ)09:22 – 11:01
  • काल(वर्जित (परंपरा))11:01 – 12:40
  • शुभ(शुभ)12:40 – 14:18
  • रोग(वर्जित (परंपरा))14:18 – 15:57
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))15:57 – 17:36
  • चर(सामान्य)17:36 – 19:15

रात

  • रोग(वर्जित (परंपरा))19:15 – 20:36
  • काल(वर्जित (परंपरा))20:36 – 21:57
  • लाभ(शुभ)21:57 – 23:18
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))23:18 – 00:40 (12 जुल॰)
  • शुभ(शुभ)00:40 (12 जुल॰) – 02:01 (12 जुल॰)
  • अमृत(शुभ)02:01 (12 जुल॰) – 03:22 (12 जुल॰)
  • चर(सामान्य)03:22 (12 जुल॰) – 04:43 (12 जुल॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))04:43 (12 जुल॰) – 06:05 (12 जुल॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

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