पंचांग 13 अगस्त 2031
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
13 अगस्त 2031 · बुधवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:15
सूर्यास्त19:03
चंद्रोदय02:54 (14 अग॰)
चंद्रास्त15:28
- मास:
- श्रावण (अमांत) · भाद्रपद (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1953 · विक्रम (चैत्रादि) 2088
- संवत्सर:
- विरोधकृत (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- वर्षा · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- कर्क
- चंद्र राशि:
- वृषभ 07:36 तक, फिर मिथुन
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- बुधवार
- तिथि
- कृष्ण एकादशी 00:59 (14 अग॰) तक, फिर कृष्ण द्वादशी 03:30 (15 अग॰) तक
- नक्षत्र
- मृगशीर्ष 21:07 तक, फिर आर्द्रा 00:13 (15 अग॰) तक
- योग
- हर्षण 03:52 (14 अग॰) तक, फिर वज्र 04:55 (15 अग॰) तक
- करण
- बव 11:43 तक, फिर बालव 00:59 (14 अग॰) तक, फिर कौलव 14:15 (14 अग॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:13 – 13:04परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
- राहु काल12:39 – 14:15
- यमगंड07:51 – 09:27
- गुलिक काल11:03 – 12:39
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- लाभ(शुभ)06:15 – 07:51
- अमृत(शुभ)07:51 – 09:27
- काल(वर्जित (परंपरा))09:27 – 11:03
- शुभ(शुभ)11:03 – 12:39
- रोग(वर्जित (परंपरा))12:39 – 14:15
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))14:15 – 15:51
- चर(सामान्य)15:51 – 17:27
- लाभ(शुभ)17:27 – 19:03
रात
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))19:03 – 20:27
- शुभ(शुभ)20:27 – 21:51
- अमृत(शुभ)21:51 – 23:15
- चर(सामान्य)23:15 – 00:39 (14 अग॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))00:39 (14 अग॰) – 02:03 (14 अग॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))02:03 (14 अग॰) – 03:27 (14 अग॰)
- लाभ(शुभ)03:27 (14 अग॰) – 04:51 (14 अग॰)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))04:51 (14 अग॰) – 06:15 (14 अग॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
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