पंचांग 3 सितंबर 2031

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

3 सितंबर 2031 · बुधवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:20
सूर्यास्त18:47
चंद्रोदय20:09
चंद्रास्त07:59
मास:
अधिक भाद्रपद (अमांत) · आश्विन (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1953 · विक्रम (चैत्रादि) 2088
संवत्सर:
विरोधकृत (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
वर्षा · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
सिंह
चंद्र राशि:
मीन

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
बुधवार
तिथि
कृष्ण द्वितीया 09:33 तक, फिर कृष्ण तृतीया 07:49 (4 सित॰) तक
नक्षत्र
उत्तरभाद्रपदा 20:40 तक, फिर रेवती 20:03 (4 सित॰) तक
योग
शूल 15:21 तक, फिर गण्ड 13:01 (4 सित॰) तक
करण
गर 09:33 तक, फिर वणिज 20:36 तक, फिर विष्टि 07:49 (4 सित॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:09 – 12:58परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
  • राहु काल12:33 – 14:07
  • यमगंड07:53 – 09:27
  • गुलिक काल11:00 – 12:33

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • लाभ(शुभ)06:20 – 07:53
  • अमृत(शुभ)07:53 – 09:27
  • काल(वर्जित (परंपरा))09:27 – 11:00
  • शुभ(शुभ)11:00 – 12:33
  • रोग(वर्जित (परंपरा))12:33 – 14:07
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))14:07 – 15:40
  • चर(सामान्य)15:40 – 17:14
  • लाभ(शुभ)17:14 – 18:47

रात

  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))18:47 – 20:14
  • शुभ(शुभ)20:14 – 21:40
  • अमृत(शुभ)21:40 – 23:07
  • चर(सामान्य)23:07 – 00:34 (4 सित॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))00:34 (4 सित॰) – 02:00 (4 सित॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))02:00 (4 सित॰) – 03:27 (4 सित॰)
  • लाभ(शुभ)03:27 (4 सित॰) – 04:53 (4 सित॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))04:53 (4 सित॰) – 06:20 (4 सित॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

अपनी कुंडली देखें