पंचांग 11 सितंबर 2031
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
11 सितंबर 2031 · गुरुवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:21
सूर्यास्त18:40
चंद्रोदय02:28 (12 सित॰)
चंद्रास्त14:54
- मास:
- अधिक भाद्रपद (अमांत) · आश्विन (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1953 · विक्रम (चैत्रादि) 2088
- संवत्सर:
- विरोधकृत (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- वर्षा · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- सिंह
- चंद्र राशि:
- मिथुन 03:26 (12 सित॰) तक, फिर कर्क
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- गुरुवार
- तिथि
- कृष्ण दशमी 15:41 तक, फिर कृष्ण एकादशी 18:06 (12 सित॰) तक
- नक्षत्र
- आर्द्रा 07:11 तक, फिर पुनर्वसु 10:11 (12 सित॰) तक
- योग
- व्यतीपात 12:28 तक, फिर वरीयान 13:24 (12 सित॰) तक
- करण
- विष्टि 15:41 तक, फिर बव 04:55 (12 सित॰) तक, फिर बालव 18:06 (12 सित॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:06 – 12:55
- राहु काल14:03 – 15:35
- यमगंड06:21 – 07:53
- गुलिक काल09:26 – 10:58
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- शुभ(शुभ)06:21 – 07:53
- रोग(वर्जित (परंपरा))07:53 – 09:26
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))09:26 – 10:58
- चर(सामान्य)10:58 – 12:31
- लाभ(शुभ)12:31 – 14:03
- अमृत(शुभ)14:03 – 15:35
- काल(वर्जित (परंपरा))15:35 – 17:08
- शुभ(शुभ)17:08 – 18:40
रात
- अमृत(शुभ)18:40 – 20:08
- चर(सामान्य)20:08 – 21:36
- रोग(वर्जित (परंपरा))21:36 – 23:03
- काल(वर्जित (परंपरा))23:03 – 00:31 (12 सित॰)
- लाभ(शुभ)00:31 (12 सित॰) – 01:58 (12 सित॰)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))01:58 (12 सित॰) – 03:26 (12 सित॰)
- शुभ(शुभ)03:26 (12 सित॰) – 04:54 (12 सित॰)
- अमृत(शुभ)04:54 (12 सित॰) – 06:21 (12 सित॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
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