पंचांग 12 अक्टूबर 2031

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

12 अक्टूबर 2031 · रविवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:27
सूर्यास्त18:14
चंद्रोदय03:38 (13 अक्टू॰)
चंद्रास्त15:29
मास:
भाद्रपद (अमांत) · आश्विन (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1953 · विक्रम (चैत्रादि) 2088
संवत्सर:
विरोधकृत (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
वर्षा · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
कन्या
चंद्र राशि:
सिंह

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
रविवार
तिथि
कृष्ण एकादशी 12:04 तक, फिर कृष्ण द्वादशी 13:22 (13 अक्टू॰) तक
नक्षत्र
मघा 01:30 (13 अक्टू॰) तक, फिर पूर्वाफाल्गुनी 03:04 (14 अक्टू॰) तक
योग
शुभ 22:32 तक, फिर शुक्ल 22:18 (13 अक्टू॰) तक
करण
बालव 12:04 तक, फिर कौलव 00:47 (13 अक्टू॰) तक, फिर तैतिल 13:22 (13 अक्टू॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त11:57 – 12:44
  • राहु काल16:46 – 18:14
  • यमगंड12:20 – 13:49
  • गुलिक काल15:17 – 16:46

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))06:27 – 07:55
  • चर(सामान्य)07:55 – 09:24
  • लाभ(शुभ)09:24 – 10:52
  • अमृत(शुभ)10:52 – 12:20
  • काल(वर्जित (परंपरा))12:20 – 13:49
  • शुभ(शुभ)13:49 – 15:17
  • रोग(वर्जित (परंपरा))15:17 – 16:46
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))16:46 – 18:14

रात

  • शुभ(शुभ)18:14 – 19:46
  • अमृत(शुभ)19:46 – 21:17
  • चर(सामान्य)21:17 – 22:49
  • रोग(वर्जित (परंपरा))22:49 – 00:21 (13 अक्टू॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))00:21 (13 अक्टू॰) – 01:52 (13 अक्टू॰)
  • लाभ(शुभ)01:52 (13 अक्टू॰) – 03:24 (13 अक्टू॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))03:24 (13 अक्टू॰) – 04:56 (13 अक्टू॰)
  • शुभ(शुभ)04:56 (13 अक्टू॰) – 06:27 (13 अक्टू॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

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