पंचांग 20 अक्टूबर 2031
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
20 अक्टूबर 2031 · सोमवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:29
सूर्यास्त18:08
चंद्रोदय10:08
चंद्रास्त21:36
- मास:
- आश्विन (अमांत)
- संवत:
- शक 1953 · विक्रम (चैत्रादि) 2088
- संवत्सर:
- विरोधकृत (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- शरद · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- तुला
- चंद्र राशि:
- वृश्चिक 01:07 (21 अक्टू॰) तक, फिर धनु
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- सोमवार
- तिथि
- शुक्ल चतुर्थी 08:25 तक, फिर शुक्ल पंचमी 06:26 (21 अक्टू॰) तक, फिर शुक्ल षष्ठी 04:21 (22 अक्टू॰) तक
- नक्षत्र
- ज्येष्ठा 01:07 (21 अक्टू॰) तक, फिर मूल 23:46 (21 अक्टू॰) तक
- योग
- सौभाग्य 09:51 तक, फिर शोभन 07:05 (21 अक्टू॰) तक
- करण
- विष्टि 08:25 तक, फिर बव 19:27 तक, फिर बालव 06:26 (21 अक्टू॰) तक, फिर कौलव 17:25 (21 अक्टू॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त11:55 – 12:42
- राहु काल07:57 – 09:24
- यमगंड10:51 – 12:19
- गुलिक काल13:46 – 15:14
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- अमृत(शुभ)06:29 – 07:57
- काल(वर्जित (परंपरा))07:57 – 09:24
- शुभ(शुभ)09:24 – 10:51
- रोग(वर्जित (परंपरा))10:51 – 12:19
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))12:19 – 13:46
- चर(सामान्य)13:46 – 15:14
- लाभ(शुभ)15:14 – 16:41
- अमृत(शुभ)16:41 – 18:08
रात
- चर(सामान्य)18:08 – 19:41
- रोग(वर्जित (परंपरा))19:41 – 21:14
- काल(वर्जित (परंपरा))21:14 – 22:46
- लाभ(शुभ)22:46 – 00:19 (21 अक्टू॰)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))00:19 (21 अक्टू॰) – 01:52 (21 अक्टू॰)
- शुभ(शुभ)01:52 (21 अक्टू॰) – 03:24 (21 अक्टू॰)
- अमृत(शुभ)03:24 (21 अक्टू॰) – 04:57 (21 अक्टू॰)
- चर(सामान्य)04:57 (21 अक्टू॰) – 06:30 (21 अक्टू॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
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