पंचांग 10 फ़रवरी 2032

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

10 फ़रवरी 2032 · मंगलवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय07:05
सूर्यास्त18:32
चंद्रोदय06:45 (11 फ़र॰)
चंद्रास्त17:41
मास:
पौष (अमांत) · माघ (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1953 · विक्रम (चैत्रादि) 2088
संवत्सर:
विरोधकृत (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
हेमंत · उत्तरायण
सूर्य राशि:
मकर
चंद्र राशि:
मकर

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
मंगलवार
तिथि
कृष्ण चतुर्दशी 15:48 तक, फिर कृष्ण अमावस्या 11:54 (11 फ़र॰) तक
नक्षत्र
उत्तराषाढ़ा 08:05 तक, फिर श्रवण 04:57 (11 फ़र॰) तक, फिर धनिष्ठा 01:51 (12 फ़र॰) तक
योग
व्यतीपात 22:53 तक, फिर वरीयान 18:27 (11 फ़र॰) तक
करण
शकुनि 15:48 तक, फिर चतुष्पद 01:51 (11 फ़र॰) तक, फिर नाग 11:54 (11 फ़र॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:25 – 13:11
  • राहु काल15:40 – 17:06
  • यमगंड09:56 – 11:22
  • गुलिक काल12:48 – 14:14

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • रोग(वर्जित (परंपरा))07:05 – 08:30
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))08:30 – 09:56
  • चर(सामान्य)09:56 – 11:22
  • लाभ(शुभ)11:22 – 12:48
  • अमृत(शुभ)12:48 – 14:14
  • काल(वर्जित (परंपरा))14:14 – 15:40
  • शुभ(शुभ)15:40 – 17:06
  • रोग(वर्जित (परंपरा))17:06 – 18:32

रात

  • काल(वर्जित (परंपरा))18:32 – 20:06
  • लाभ(शुभ)20:06 – 21:40
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))21:40 – 23:14
  • शुभ(शुभ)23:14 – 00:48 (11 फ़र॰)
  • अमृत(शुभ)00:48 (11 फ़र॰) – 02:22 (11 फ़र॰)
  • चर(सामान्य)02:22 (11 फ़र॰) – 03:56 (11 फ़र॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))03:56 (11 फ़र॰) – 05:30 (11 फ़र॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))05:30 (11 फ़र॰) – 07:04 (11 फ़र॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

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