पंचांग 13 सितंबर 2033

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

13 सितंबर 2033 · मंगलवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:22
सूर्यास्त18:38
चंद्रोदय22:16
चंद्रास्त10:28
मास:
भाद्रपद (अमांत) · आश्विन (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1955 · विक्रम (चैत्रादि) 2090
संवत्सर:
प्रमादी (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
वर्षा · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
सिंह
चंद्र राशि:
मेष 21:07 तक, फिर वृषभ

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
मंगलवार
तिथि
कृष्ण पंचमी 15:25 तक, फिर कृष्ण षष्ठी 13:14 (14 सित॰) तक
नक्षत्र
भरणी 15:31 तक, फिर कृत्तिका 14:06 (14 सित॰) तक
योग
व्याघात 15:37 तक, फिर हर्षण 12:44 (14 सित॰) तक
करण
तैतिल 15:25 तक, फिर गर 02:15 (14 सित॰) तक, फिर वणिज 13:14 (14 सित॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:05 – 12:54
  • राहु काल15:34 – 17:06
  • यमगंड09:26 – 10:58
  • गुलिक काल12:30 – 14:02

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • रोग(वर्जित (परंपरा))06:22 – 07:54
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))07:54 – 09:26
  • चर(सामान्य)09:26 – 10:58
  • लाभ(शुभ)10:58 – 12:30
  • अमृत(शुभ)12:30 – 14:02
  • काल(वर्जित (परंपरा))14:02 – 15:34
  • शुभ(शुभ)15:34 – 17:06
  • रोग(वर्जित (परंपरा))17:06 – 18:38

रात

  • काल(वर्जित (परंपरा))18:38 – 20:06
  • लाभ(शुभ)20:06 – 21:34
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))21:34 – 23:02
  • शुभ(शुभ)23:02 – 00:30 (14 सित॰)
  • अमृत(शुभ)00:30 (14 सित॰) – 01:58 (14 सित॰)
  • चर(सामान्य)01:58 (14 सित॰) – 03:26 (14 सित॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))03:26 (14 सित॰) – 04:54 (14 सित॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))04:54 (14 सित॰) – 06:22 (14 सित॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

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