पंचांग 9 अक्टूबर 2033

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

9 अक्टूबर 2033 · रविवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:26
सूर्यास्त18:16
चंद्रोदय19:10
चंद्रास्त07:06
मास:
आश्विन (अमांत) · कार्तिक (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1955 · विक्रम (चैत्रादि) 2090
संवत्सर:
प्रमादी (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
शरद · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
कन्या
चंद्र राशि:
मेष

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
रविवार
तिथि
कृष्ण प्रतिपदा 12:41 तक, फिर कृष्ण द्वितीया 09:04 (10 अक्टू॰) तक
नक्षत्र
अश्विनी 03:30 (10 अक्टू॰) तक, फिर भरणी 00:53 (11 अक्टू॰) तक
योग
व्याघात 08:47 तक, फिर हर्षण 04:37 (10 अक्टू॰) तक, फिर वज्र 00:40 (11 अक्टू॰) तक
करण
कौलव 12:41 तक, फिर तैतिल 22:51 तक, फिर गर 09:04 (10 अक्टू॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त11:58 – 12:45
  • राहु काल16:47 – 18:16
  • यमगंड12:21 – 13:50
  • गुलिक काल15:19 – 16:47

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))06:26 – 07:55
  • चर(सामान्य)07:55 – 09:24
  • लाभ(शुभ)09:24 – 10:52
  • अमृत(शुभ)10:52 – 12:21
  • काल(वर्जित (परंपरा))12:21 – 13:50
  • शुभ(शुभ)13:50 – 15:19
  • रोग(वर्जित (परंपरा))15:19 – 16:47
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))16:47 – 18:16

रात

  • शुभ(शुभ)18:16 – 19:47
  • अमृत(शुभ)19:47 – 21:19
  • चर(सामान्य)21:19 – 22:50
  • रोग(वर्जित (परंपरा))22:50 – 00:21 (10 अक्टू॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))00:21 (10 अक्टू॰) – 01:53 (10 अक्टू॰)
  • लाभ(शुभ)01:53 (10 अक्टू॰) – 03:24 (10 अक्टू॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))03:24 (10 अक्टू॰) – 04:55 (10 अक्टू॰)
  • शुभ(शुभ)04:55 (10 अक्टू॰) – 06:27 (10 अक्टू॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

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