पंचांग 30 दिसंबर 2033

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

30 दिसंबर 2033 · शुक्रवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय07:06
सूर्यास्त18:08
चंद्रोदय13:26
चंद्रास्त02:19 (31 दिस॰)
मास:
पौष (अमांत)
संवत:
शक 1955 · विक्रम (चैत्रादि) 2090
संवत्सर:
प्रमादी (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
हेमंत · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
धनु
चंद्र राशि:
मीन 10:21 तक, फिर मेष

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
शुक्रवार
तिथि
शुक्ल नवमी 14:50 तक, फिर शुक्ल दशमी 12:35 (31 दिस॰) तक
नक्षत्र
रेवती 10:21 तक, फिर अश्विनी 08:49 (31 दिस॰) तक
योग
परिघ 08:34 तक, फिर शिव 05:34 (31 दिस॰) तक, फिर सिद्ध 02:26 (1 जन॰) तक
करण
कौलव 14:50 तक, फिर तैतिल 01:44 (31 दिस॰) तक, फिर गर 12:35 (31 दिस॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:15 – 12:59
  • राहु काल11:14 – 12:37
  • यमगंड15:22 – 16:45
  • गुलिक काल08:28 – 09:51

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • चर(सामान्य)07:06 – 08:28
  • लाभ(शुभ)08:28 – 09:51
  • अमृत(शुभ)09:51 – 11:14
  • काल(वर्जित (परंपरा))11:14 – 12:37
  • शुभ(शुभ)12:37 – 13:59
  • रोग(वर्जित (परंपरा))13:59 – 15:22
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))15:22 – 16:45
  • चर(सामान्य)16:45 – 18:08

रात

  • रोग(वर्जित (परंपरा))18:08 – 19:45
  • काल(वर्जित (परंपरा))19:45 – 21:22
  • लाभ(शुभ)21:22 – 23:00
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))23:00 – 00:37 (31 दिस॰)
  • शुभ(शुभ)00:37 (31 दिस॰) – 02:14 (31 दिस॰)
  • अमृत(शुभ)02:14 (31 दिस॰) – 03:51 (31 दिस॰)
  • चर(सामान्य)03:51 (31 दिस॰) – 05:29 (31 दिस॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))05:29 (31 दिस॰) – 07:06 (31 दिस॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

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