पंचांग 2 सितंबर 2034

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

2 सितंबर 2034 · शनिवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:20
सूर्यास्त18:48
चंद्रोदय21:42
चंद्रास्त09:36
मास:
श्रावण (अमांत) · भाद्रपद (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1956 · विक्रम (चैत्रादि) 2091
संवत्सर:
आनंद (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
वर्षा · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
सिंह
चंद्र राशि:
मीन 07:35 तक, फिर मेष

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
शनिवार
तिथि
कृष्ण चतुर्थी 13:37 तक, फिर कृष्ण पंचमी 11:06 (3 सित॰) तक
नक्षत्र
रेवती 07:35 तक, फिर अश्विनी 05:51 (3 सित॰) तक, फिर भरणी 04:10 (4 सित॰) तक
योग
वृद्धि 01:16 (3 सित॰) तक, फिर ध्रुव 22:09 (3 सित॰) तक
करण
बालव 13:37 तक, फिर कौलव 00:21 (3 सित॰) तक, फिर तैतिल 11:06 (3 सित॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:09 – 12:59
  • राहु काल09:27 – 11:00
  • यमगंड14:07 – 15:41
  • गुलिक काल06:20 – 07:53

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • काल(वर्जित (परंपरा))06:20 – 07:53
  • शुभ(शुभ)07:53 – 09:27
  • रोग(वर्जित (परंपरा))09:27 – 11:00
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))11:00 – 12:34
  • चर(सामान्य)12:34 – 14:07
  • लाभ(शुभ)14:07 – 15:41
  • अमृत(शुभ)15:41 – 17:14
  • काल(वर्जित (परंपरा))17:14 – 18:48

रात

  • लाभ(शुभ)18:48 – 20:14
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))20:14 – 21:41
  • शुभ(शुभ)21:41 – 23:07
  • अमृत(शुभ)23:07 – 00:34 (3 सित॰)
  • चर(सामान्य)00:34 (3 सित॰) – 02:00 (3 सित॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))02:00 (3 सित॰) – 03:27 (3 सित॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))03:27 (3 सित॰) – 04:53 (3 सित॰)
  • लाभ(शुभ)04:53 (3 सित॰) – 06:20 (3 सित॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

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