पंचांग 9 सितंबर 2034
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
9 सितंबर 2034 · शनिवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:21
सूर्यास्त18:42
चंद्रोदय04:04 (10 सित॰)
चंद्रास्त16:16
- मास:
- श्रावण (अमांत) · भाद्रपद (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1956 · विक्रम (चैत्रादि) 2091
- संवत्सर:
- आनंद (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- वर्षा · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- सिंह
- चंद्र राशि:
- कर्क
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- शनिवार
- तिथि
- कृष्ण द्वादशी 22:07 तक, फिर कृष्ण त्रयोदशी 21:31 (10 सित॰) तक
- नक्षत्र
- पुष्य 21:59 तक, फिर आश्लेषा 22:06 (10 सित॰) तक
- योग
- वरीयान 06:22 तक, फिर परिघ 04:35 (10 सित॰) तक, फिर शिव 03:08 (11 सित॰) तक
- करण
- कौलव 10:34 तक, फिर तैतिल 22:07 तक, फिर गर 09:46 (10 सित॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:07 – 12:56
- राहु काल09:26 – 10:59
- यमगंड14:04 – 15:37
- गुलिक काल06:21 – 07:53
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- काल(वर्जित (परंपरा))06:21 – 07:53
- शुभ(शुभ)07:53 – 09:26
- रोग(वर्जित (परंपरा))09:26 – 10:59
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))10:59 – 12:31
- चर(सामान्य)12:31 – 14:04
- लाभ(शुभ)14:04 – 15:37
- अमृत(शुभ)15:37 – 17:09
- काल(वर्जित (परंपरा))17:09 – 18:42
रात
- लाभ(शुभ)18:42 – 20:09
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))20:09 – 21:37
- शुभ(शुभ)21:37 – 23:04
- अमृत(शुभ)23:04 – 00:31 (10 सित॰)
- चर(सामान्य)00:31 (10 सित॰) – 01:59 (10 सित॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))01:59 (10 सित॰) – 03:26 (10 सित॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))03:26 (10 सित॰) – 04:54 (10 सित॰)
- लाभ(शुभ)04:54 (10 सित॰) – 06:21 (10 सित॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61
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