पंचांग 31 अगस्त 2035

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

31 अगस्त 2035 · शुक्रवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:19
सूर्यास्त18:50
चंद्रोदय05:21 (1 सित॰)
चंद्रास्त17:30
मास:
श्रावण (अमांत) · भाद्रपद (पूर्णिमांत)
संवत:
शक 1957 · विक्रम (चैत्रादि) 2092
संवत्सर:
राक्षस (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
वर्षा · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
सिंह
चंद्र राशि:
कर्क 06:02 (1 सित॰) तक, फिर सिंह

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
शुक्रवार
तिथि
कृष्ण त्रयोदशी 12:22 तक, फिर कृष्ण चतुर्दशी 09:47 (1 सित॰) तक
नक्षत्र
पुष्य 07:53 तक, फिर आश्लेषा 06:02 (1 सित॰) तक, फिर मघा 04:28 (2 सित॰) तक
योग
वरीयान 08:06 तक, फिर परिघ 04:52 (1 सित॰) तक, फिर शिव 01:50 (2 सित॰) तक
करण
वणिज 12:22 तक, फिर विष्टि 23:03 तक, फिर शकुनि 09:47 (1 सित॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:09 – 12:59
  • राहु काल11:01 – 12:34
  • यमगंड15:42 – 17:16
  • गुलिक काल07:53 – 09:27

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • चर(सामान्य)06:19 – 07:53
  • लाभ(शुभ)07:53 – 09:27
  • अमृत(शुभ)09:27 – 11:01
  • काल(वर्जित (परंपरा))11:01 – 12:34
  • शुभ(शुभ)12:34 – 14:08
  • रोग(वर्जित (परंपरा))14:08 – 15:42
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))15:42 – 17:16
  • चर(सामान्य)17:16 – 18:50

रात

  • रोग(वर्जित (परंपरा))18:50 – 20:16
  • काल(वर्जित (परंपरा))20:16 – 21:42
  • लाभ(शुभ)21:42 – 23:08
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))23:08 – 00:34 (1 सित॰)
  • शुभ(शुभ)00:34 (1 सित॰) – 02:01 (1 सित॰)
  • अमृत(शुभ)02:01 (1 सित॰) – 03:27 (1 सित॰)
  • चर(सामान्य)03:27 (1 सित॰) – 04:53 (1 सित॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))04:53 (1 सित॰) – 06:19 (1 सित॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

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