पंचांग 28 सितंबर 2036

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

28 सितंबर 2036 · रविवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:24
सूर्यास्त18:25
चंद्रोदय13:47
चंद्रास्त01:14 (29 सित॰)
मास:
आश्विन (अमांत)
संवत:
शक 1958 · विक्रम (चैत्रादि) 2093
संवत्सर:
नल (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
शरद · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
कन्या
चंद्र राशि:
धनु 03:01 (29 सित॰) तक, फिर मकर

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
रविवार
तिथि
शुक्ल नवमी 02:57 (29 सित॰) तक, फिर शुक्ल दशमी 05:32 (30 सित॰) तक
नक्षत्र
पूर्वाषाढ़ा 20:17 तक, फिर उत्तराषाढ़ा 23:19 (29 सित॰) तक
योग
शोभन 17:07 तक, फिर अतिगण्ड 18:03 (29 सित॰) तक
करण
बालव 13:45 तक, फिर कौलव 02:57 (29 सित॰) तक, फिर तैतिल 16:13 (29 सित॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:00 – 12:48
  • राहु काल16:55 – 18:25
  • यमगंड12:24 – 13:55
  • गुलिक काल15:25 – 16:55

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))06:24 – 07:54
  • चर(सामान्य)07:54 – 09:24
  • लाभ(शुभ)09:24 – 10:54
  • अमृत(शुभ)10:54 – 12:24
  • काल(वर्जित (परंपरा))12:24 – 13:55
  • शुभ(शुभ)13:55 – 15:25
  • रोग(वर्जित (परंपरा))15:25 – 16:55
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))16:55 – 18:25

रात

  • शुभ(शुभ)18:25 – 19:55
  • अमृत(शुभ)19:55 – 21:25
  • चर(सामान्य)21:25 – 22:55
  • रोग(वर्जित (परंपरा))22:55 – 00:25 (29 सित॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))00:25 (29 सित॰) – 01:54 (29 सित॰)
  • लाभ(शुभ)01:54 (29 सित॰) – 03:24 (29 सित॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))03:24 (29 सित॰) – 04:54 (29 सित॰)
  • शुभ(शुभ)04:54 (29 सित॰) – 06:24 (29 सित॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 61

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