पंचांग 31 दिसंबर 2036

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

31 दिसंबर 2036 · बुधवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय07:06
सूर्यास्त18:08
चंद्रोदय16:37
चंद्रास्त06:01 (1 जन॰)
मास:
पौष (अमांत)
संवत:
शक 1958 · विक्रम (चैत्रादि) 2093
संवत्सर:
नल (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
हेमंत · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
धनु
चंद्र राशि:
वृषभ 02:54 (1 जन॰) तक, फिर मिथुन

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
बुधवार
तिथि
शुक्ल त्रयोदशी 13:08 तक, फिर शुक्ल चतुर्दशी 10:50 (1 जन॰) तक
नक्षत्र
रोहिणी 15:41 तक, फिर मृगशीर्ष 14:00 (1 जन॰) तक
योग
शुभ 11:33 तक, फिर शुक्ल 08:29 (1 जन॰) तक
करण
तैतिल 13:08 तक, फिर गर 00:03 (1 जन॰) तक, फिर वणिज 10:50 (1 जन॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:15 – 12:59परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
  • राहु काल12:37 – 14:00
  • यमगंड08:29 – 09:52
  • गुलिक काल11:14 – 12:37

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • लाभ(शुभ)07:06 – 08:29
  • अमृत(शुभ)08:29 – 09:52
  • काल(वर्जित (परंपरा))09:52 – 11:14
  • शुभ(शुभ)11:14 – 12:37
  • रोग(वर्जित (परंपरा))12:37 – 14:00
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))14:00 – 15:23
  • चर(सामान्य)15:23 – 16:46
  • लाभ(शुभ)16:46 – 18:08

रात

  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))18:08 – 19:46
  • शुभ(शुभ)19:46 – 21:23
  • अमृत(शुभ)21:23 – 23:00
  • चर(सामान्य)23:00 – 00:37 (1 जन॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))00:37 (1 जन॰) – 02:15 (1 जन॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))02:15 (1 जन॰) – 03:52 (1 जन॰)
  • लाभ(शुभ)03:52 (1 जन॰) – 05:29 (1 जन॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))05:29 (1 जन॰) – 07:06 (1 जन॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123

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