पंचांग 30 मार्च 2037

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

30 मार्च 2037 · सोमवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:30
सूर्यास्त18:47
चंद्रोदय17:53
चंद्रास्त06:28 (31 मार्च)
मास:
चैत्र (अमांत)
संवत:
शक 1959 · विक्रम (चैत्रादि) 2094
संवत्सर:
पिंगल (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
वसंत · उत्तरायण
सूर्य राशि:
मीन
चंद्र राशि:
सिंह 12:57 तक, फिर कन्या

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
सोमवार
तिथि
शुक्ल चतुर्दशी 18:59 तक, फिर शुक्ल पूर्णिमा 15:23 (31 मार्च) तक
नक्षत्र
पूर्वाफाल्गुनी 07:39 तक, फिर उत्तराफाल्गुनी 04:49 (31 मार्च) तक, फिर हस्त 02:04 (1 अप्रैल) तक
योग
गण्ड 09:38 तक, फिर वृद्धि 05:29 (31 मार्च) तक, फिर ध्रुव 01:26 (1 अप्रैल) तक
करण
गर 08:48 तक, फिर वणिज 18:59 तक, फिर विष्टि 05:10 (31 मार्च) तक, फिर बव 15:23 (31 मार्च) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त12:14 – 13:03
  • राहु काल08:02 – 09:34
  • यमगंड11:06 – 12:39
  • गुलिक काल14:11 – 15:43

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • अमृत(शुभ)06:30 – 08:02
  • काल(वर्जित (परंपरा))08:02 – 09:34
  • शुभ(शुभ)09:34 – 11:06
  • रोग(वर्जित (परंपरा))11:06 – 12:39
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))12:39 – 14:11
  • चर(सामान्य)14:11 – 15:43
  • लाभ(शुभ)15:43 – 17:15
  • अमृत(शुभ)17:15 – 18:47

रात

  • चर(सामान्य)18:47 – 20:15
  • रोग(वर्जित (परंपरा))20:15 – 21:43
  • काल(वर्जित (परंपरा))21:43 – 23:10
  • लाभ(शुभ)23:10 – 00:38 (31 मार्च)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))00:38 (31 मार्च) – 02:06 (31 मार्च)
  • शुभ(शुभ)02:06 (31 मार्च) – 03:34 (31 मार्च)
  • अमृत(शुभ)03:34 (31 मार्च) – 05:01 (31 मार्च)
  • चर(सामान्य)05:01 (31 मार्च) – 06:29 (31 मार्च)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123

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