पंचांग 13 अगस्त 2037
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
13 अगस्त 2037 · गुरुवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:15
सूर्यास्त19:02
चंद्रोदय08:01
चंद्रास्त20:51
- मास:
- श्रावण (अमांत)
- संवत:
- शक 1959 · विक्रम (चैत्रादि) 2094
- संवत्सर:
- पिंगल (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- वर्षा · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- कर्क
- चंद्र राशि:
- सिंह 00:36 (14 अग॰) तक, फिर कन्या
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- गुरुवार
- तिथि
- शुक्ल द्वितीया 09:13 तक, फिर शुक्ल तृतीया 05:44 (14 अग॰) तक, फिर शुक्ल चतुर्थी 02:28 (15 अग॰) तक
- नक्षत्र
- पूर्वाफाल्गुनी 19:16 तक, फिर उत्तराफाल्गुनी 16:41 (14 अग॰) तक
- योग
- शिव 00:06 (14 अग॰) तक, फिर सिद्ध 20:16 (14 अग॰) तक
- करण
- कौलव 09:13 तक, फिर तैतिल 19:28 तक, फिर गर 05:44 (14 अग॰) तक, फिर वणिज 16:04 (14 अग॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:13 – 13:04
- राहु काल14:15 – 15:51
- यमगंड06:15 – 07:51
- गुलिक काल09:27 – 11:03
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- शुभ(शुभ)06:15 – 07:51
- रोग(वर्जित (परंपरा))07:51 – 09:27
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))09:27 – 11:03
- चर(सामान्य)11:03 – 12:39
- लाभ(शुभ)12:39 – 14:15
- अमृत(शुभ)14:15 – 15:51
- काल(वर्जित (परंपरा))15:51 – 17:26
- शुभ(शुभ)17:26 – 19:02
रात
- अमृत(शुभ)19:02 – 20:26
- चर(सामान्य)20:26 – 21:51
- रोग(वर्जित (परंपरा))21:51 – 23:15
- काल(वर्जित (परंपरा))23:15 – 00:39 (14 अग॰)
- लाभ(शुभ)00:39 (14 अग॰) – 02:03 (14 अग॰)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))02:03 (14 अग॰) – 03:27 (14 अग॰)
- शुभ(शुभ)03:27 (14 अग॰) – 04:51 (14 अग॰)
- अमृत(शुभ)04:51 (14 अग॰) – 06:16 (14 अग॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123
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