पंचांग 23 सितंबर 2037
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
23 सितंबर 2037 · बुधवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:23
सूर्यास्त18:29
चंद्रोदय18:05
चंद्रास्त06:07 (24 सित॰)
- मास:
- भाद्रपद (अमांत)
- संवत:
- शक 1959 · विक्रम (चैत्रादि) 2094
- संवत्सर:
- पिंगल (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- वर्षा · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- कन्या
- चंद्र राशि:
- कुंभ 02:04 (24 सित॰) तक, फिर मीन
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- बुधवार
- तिथि
- शुक्ल चतुर्दशी 14:33 तक, फिर शुक्ल पूर्णिमा 17:01 (24 सित॰) तक
- नक्षत्र
- पूर्वभाद्रपदा 08:49 (24 सित॰) तक
- योग
- शूल 13:24 तक, फिर गण्ड 14:20 (24 सित॰) तक
- करण
- वणिज 14:33 तक, फिर विष्टि 03:47 (24 सित॰) तक, फिर बव 17:01 (24 सित॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:02 – 12:50परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
- राहु काल12:26 – 13:57
- यमगंड07:54 – 09:25
- गुलिक काल10:55 – 12:26
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- लाभ(शुभ)06:23 – 07:54
- अमृत(शुभ)07:54 – 09:25
- काल(वर्जित (परंपरा))09:25 – 10:55
- शुभ(शुभ)10:55 – 12:26
- रोग(वर्जित (परंपरा))12:26 – 13:57
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))13:57 – 15:28
- चर(सामान्य)15:28 – 16:59
- लाभ(शुभ)16:59 – 18:29
रात
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))18:29 – 19:59
- शुभ(शुभ)19:59 – 21:28
- अमृत(शुभ)21:28 – 22:57
- चर(सामान्य)22:57 – 00:26 (24 सित॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))00:26 (24 सित॰) – 01:56 (24 सित॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))01:56 (24 सित॰) – 03:25 (24 सित॰)
- लाभ(शुभ)03:25 (24 सित॰) – 04:54 (24 सित॰)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))04:54 (24 सित॰) – 06:23 (24 सित॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123
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