पंचांग 13 अक्टूबर 2037

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

13 अक्टूबर 2037 · मंगलवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:27
सूर्यास्त18:13
चंद्रोदय10:36
चंद्रास्त22:04
मास:
आश्विन (अमांत)
संवत:
शक 1959 · विक्रम (चैत्रादि) 2094
संवत्सर:
पिंगल (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
शरद · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
कन्या
चंद्र राशि:
वृश्चिक 00:47 (14 अक्टू॰) तक, फिर धनु

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
मंगलवार
तिथि
शुक्ल पंचमी 17:56 तक, फिर शुक्ल षष्ठी 17:13 (14 अक्टू॰) तक
नक्षत्र
ज्येष्ठा 00:47 (14 अक्टू॰) तक, फिर मूल 01:00 (15 अक्टू॰) तक
योग
सौभाग्य 19:41 तक, फिर शोभन 18:02 (14 अक्टू॰) तक
करण
बव 06:36 तक, फिर बालव 17:56 तक, फिर कौलव 05:28 (14 अक्टू॰) तक, फिर तैतिल 17:13 (14 अक्टू॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त11:57 – 12:44
  • राहु काल15:17 – 16:45
  • यमगंड09:24 – 10:52
  • गुलिक काल12:20 – 13:48

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • रोग(वर्जित (परंपरा))06:27 – 07:56
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))07:56 – 09:24
  • चर(सामान्य)09:24 – 10:52
  • लाभ(शुभ)10:52 – 12:20
  • अमृत(शुभ)12:20 – 13:48
  • काल(वर्जित (परंपरा))13:48 – 15:17
  • शुभ(शुभ)15:17 – 16:45
  • रोग(वर्जित (परंपरा))16:45 – 18:13

रात

  • काल(वर्जित (परंपरा))18:13 – 19:45
  • लाभ(शुभ)19:45 – 21:17
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))21:17 – 22:48
  • शुभ(शुभ)22:48 – 00:20 (14 अक्टू॰)
  • अमृत(शुभ)00:20 (14 अक्टू॰) – 01:52 (14 अक्टू॰)
  • चर(सामान्य)01:52 (14 अक्टू॰) – 03:24 (14 अक्टू॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))03:24 (14 अक्टू॰) – 04:56 (14 अक्टू॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))04:56 (14 अक्टू॰) – 06:28 (14 अक्टू॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123

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