पंचांग 18 नवंबर 2037

तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।

स्थान
तिथि (तारीख)

18 नवंबर 2037 · बुधवार

पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)

इस महीने का पंचांग (कैलेंडर)
सूर्योदय06:42
सूर्यास्त17:56
चंद्रोदय15:17
चंद्रास्त03:34 (19 नव॰)
मास:
कार्तिक (अमांत)
संवत:
शक 1959 · विक्रम (चैत्रादि) 2094
संवत्सर:
पिंगल (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
ऋतु · अयन:
शरद · दक्षिणायन
सूर्य राशि:
वृश्चिक
चंद्र राशि:
मीन

पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक

वार
बुधवार
तिथि
शुक्ल एकादशी 19:59 तक, फिर शुक्ल द्वादशी 22:18 (19 नव॰) तक
नक्षत्र
उत्तरभाद्रपदा 00:56 (19 नव॰) तक, फिर रेवती 03:40 (20 नव॰) तक
योग
वज्र 02:39 (19 नव॰) तक, फिर सिद्धि 03:17 (20 नव॰) तक
करण
वणिज 06:44 तक, फिर विष्टि 19:59 तक, फिर बव 09:11 (19 नव॰) तक

मुहूर्त-काल

  • अभिजित मुहूर्त11:57 – 12:42परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
  • राहु काल12:19 – 13:43
  • यमगंड08:07 – 09:31
  • गुलिक काल10:55 – 12:19

राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।

चौघड़िया

दिन

  • लाभ(शुभ)06:42 – 08:07
  • अमृत(शुभ)08:07 – 09:31
  • काल(वर्जित (परंपरा))09:31 – 10:55
  • शुभ(शुभ)10:55 – 12:19
  • रोग(वर्जित (परंपरा))12:19 – 13:43
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))13:43 – 15:08
  • चर(सामान्य)15:08 – 16:32
  • लाभ(शुभ)16:32 – 17:56

रात

  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))17:56 – 19:32
  • शुभ(शुभ)19:32 – 21:08
  • अमृत(शुभ)21:08 – 22:44
  • चर(सामान्य)22:44 – 00:19 (19 नव॰)
  • रोग(वर्जित (परंपरा))00:19 (19 नव॰) – 01:55 (19 नव॰)
  • काल(वर्जित (परंपरा))01:55 (19 नव॰) – 03:31 (19 नव॰)
  • लाभ(शुभ)03:31 (19 नव॰) – 05:07 (19 नव॰)
  • उद्वेग(वर्जित (परंपरा))05:07 (19 नव॰) – 06:43 (19 नव॰)

पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।

निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।

पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123

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