पंचांग 16 दिसंबर 2037
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
16 दिसंबर 2037 · बुधवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:59
सूर्यास्त18:00
चंद्रोदय13:50
चंद्रास्त02:15 (17 दिस॰)
- मास:
- मार्गशीर्ष (अमांत)
- संवत:
- शक 1959 · विक्रम (चैत्रादि) 2094
- संवत्सर:
- पिंगल (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- हेमंत · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- धनु
- चंद्र राशि:
- मीन
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- बुधवार
- तिथि
- शुक्ल नवमी 12:00 तक, फिर शुक्ल दशमी 14:22 (17 दिस॰) तक
- नक्षत्र
- उत्तरभाद्रपदा 08:48 तक, फिर रेवती 11:38 (17 दिस॰) तक
- योग
- व्यतीपात 08:35 तक, फिर वरीयान 09:20 (17 दिस॰) तक
- करण
- कौलव 12:00 तक, फिर तैतिल 01:13 (17 दिस॰) तक, फिर गर 14:22 (17 दिस॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:08 – 12:52परंपरा में बुधवार को अभिजित नहीं लिया जाता
- राहु काल12:30 – 13:52
- यमगंड08:22 – 09:44
- गुलिक काल11:07 – 12:30
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- लाभ(शुभ)06:59 – 08:22
- अमृत(शुभ)08:22 – 09:44
- काल(वर्जित (परंपरा))09:44 – 11:07
- शुभ(शुभ)11:07 – 12:30
- रोग(वर्जित (परंपरा))12:30 – 13:52
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))13:52 – 15:15
- चर(सामान्य)15:15 – 16:38
- लाभ(शुभ)16:38 – 18:00
रात
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))18:00 – 19:38
- शुभ(शुभ)19:38 – 21:15
- अमृत(शुभ)21:15 – 22:53
- चर(सामान्य)22:53 – 00:30 (17 दिस॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))00:30 (17 दिस॰) – 02:07 (17 दिस॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))02:07 (17 दिस॰) – 03:45 (17 दिस॰)
- लाभ(शुभ)03:45 (17 दिस॰) – 05:22 (17 दिस॰)
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))05:22 (17 दिस॰) – 06:59 (17 दिस॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123
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