पंचांग 22 दिसंबर 2037
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
22 दिसंबर 2037 · मंगलवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय07:02
सूर्यास्त18:03
चंद्रोदय18:00
चंद्रास्तनहीं
- मास:
- मार्गशीर्ष (अमांत)
- संवत:
- शक 1959 · विक्रम (चैत्रादि) 2094
- संवत्सर:
- पिंगल (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- हेमंत · दक्षिणायन
- सूर्य राशि:
- धनु
- चंद्र राशि:
- मिथुन
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- मंगलवार
- तिथि
- शुक्ल पूर्णिमा 19:08 तक, फिर कृष्ण प्रतिपदा 18:31 (23 दिस॰) तक
- नक्षत्र
- मृगशीर्ष 19:09 तक, फिर आर्द्रा 19:09 (23 दिस॰) तक
- योग
- शुभ 07:53 तक, फिर शुक्ल 06:22 (23 दिस॰) तक, फिर ब्रह्म 04:30 (24 दिस॰) तक
- करण
- विष्टि 07:16 तक, फिर बव 19:08 तक, फिर बालव 06:53 (23 दिस॰) तक, फिर कौलव 18:31 (23 दिस॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:11 – 12:55
- राहु काल15:18 – 16:41
- यमगंड09:47 – 11:10
- गुलिक काल12:33 – 13:55
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- रोग(वर्जित (परंपरा))07:02 – 08:25
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))08:25 – 09:47
- चर(सामान्य)09:47 – 11:10
- लाभ(शुभ)11:10 – 12:33
- अमृत(शुभ)12:33 – 13:55
- काल(वर्जित (परंपरा))13:55 – 15:18
- शुभ(शुभ)15:18 – 16:41
- रोग(वर्जित (परंपरा))16:41 – 18:03
रात
- काल(वर्जित (परंपरा))18:03 – 19:41
- लाभ(शुभ)19:41 – 21:18
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))21:18 – 22:55
- शुभ(शुभ)22:55 – 00:33 (23 दिस॰)
- अमृत(शुभ)00:33 (23 दिस॰) – 02:10 (23 दिस॰)
- चर(सामान्य)02:10 (23 दिस॰) – 03:48 (23 दिस॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))03:48 (23 दिस॰) – 05:25 (23 दिस॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))05:25 (23 दिस॰) – 07:03 (23 दिस॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123
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