पंचांग 20 फ़रवरी 2038
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
20 फ़रवरी 2038 · शनिवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:59
सूर्यास्त18:37
चंद्रोदय19:29
चंद्रास्त07:31
- मास:
- माघ (अमांत) · फाल्गुन (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1959 · विक्रम (चैत्रादि) 2094
- संवत्सर:
- पिंगल (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- शिशिर · उत्तरायण
- सूर्य राशि:
- कुंभ
- चंद्र राशि:
- सिंह
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- शनिवार
- तिथि
- कृष्ण प्रतिपदा 18:25 तक, फिर कृष्ण द्वितीया 15:02 (21 फ़र॰) तक
- नक्षत्र
- मघा 08:21 तक, फिर पूर्वाफाल्गुनी 05:46 (21 फ़र॰) तक, फिर उत्तराफाल्गुनी 03:07 (22 फ़र॰) तक
- योग
- अतिगण्ड 07:36 तक, फिर सुकर्मा 03:40 (21 फ़र॰) तक, फिर धृति 23:40 (21 फ़र॰) तक
- करण
- बालव 08:04 तक, फिर कौलव 18:25 तक, फिर तैतिल 04:44 (21 फ़र॰) तक, फिर गर 15:02 (21 फ़र॰) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:25 – 13:11
- राहु काल09:53 – 11:21
- यमगंड14:15 – 15:42
- गुलिक काल06:59 – 08:26
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- काल(वर्जित (परंपरा))06:59 – 08:26
- शुभ(शुभ)08:26 – 09:53
- रोग(वर्जित (परंपरा))09:53 – 11:21
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))11:21 – 12:48
- चर(सामान्य)12:48 – 14:15
- लाभ(शुभ)14:15 – 15:42
- अमृत(शुभ)15:42 – 17:09
- काल(वर्जित (परंपरा))17:09 – 18:37
रात
- लाभ(शुभ)18:37 – 20:09
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))20:09 – 21:42
- शुभ(शुभ)21:42 – 23:15
- अमृत(शुभ)23:15 – 00:48 (21 फ़र॰)
- चर(सामान्य)00:48 (21 फ़र॰) – 02:20 (21 फ़र॰)
- रोग(वर्जित (परंपरा))02:20 (21 फ़र॰) – 03:53 (21 फ़र॰)
- काल(वर्जित (परंपरा))03:53 (21 फ़र॰) – 05:26 (21 फ़र॰)
- लाभ(शुभ)05:26 (21 फ़र॰) – 06:58 (21 फ़र॰)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123
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