पंचांग 3 अप्रैल 2038
तिथि और स्थान चुनें — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल और चौघड़िया। गणना आपके फ़ोन पर ही होती है।
स्थान
तिथि (तारीख)
3 अप्रैल 2038 · शनिवार
पुणे — Pune, Maharashtra · समय इस स्थान के समय-क्षेत्र में (Asia/Kolkata)
इस महीने का पंचांग (कैलेंडर) सूर्योदय06:27
सूर्यास्त18:48
चंद्रोदय06:21 (4 अप्रैल)
चंद्रास्त17:52
- मास:
- फाल्गुन (अमांत) · चैत्र (पूर्णिमांत)
- संवत:
- शक 1959 · विक्रम (चैत्रादि) 2094
- संवत्सर:
- पिंगल (शक-आधारित, महाराष्ट्र/दक्षिण परंपरा)
- ऋतु · अयन:
- शिशिर · उत्तरायण
- सूर्य राशि:
- मीन
- चंद्र राशि:
- मीन
पंचांग के अंग — सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक
- वार
- शनिवार
- तिथि
- कृष्ण चतुर्दशी 19:47 तक, फिर कृष्ण अमावस्या 22:13 (4 अप्रैल) तक
- नक्षत्र
- पूर्वभाद्रपदा 11:19 तक, फिर उत्तरभाद्रपदा 14:13 (4 अप्रैल) तक
- योग
- शुक्ल 06:38 तक, फिर ब्रह्म 07:27 (4 अप्रैल) तक
- करण
- विष्टि 06:37 तक, फिर शकुनि 19:47 तक, फिर चतुष्पद 08:59 (4 अप्रैल) तक
मुहूर्त-काल
- अभिजित मुहूर्त12:13 – 13:02
- राहु काल09:32 – 11:05
- यमगंड14:10 – 15:43
- गुलिक काल06:27 – 07:59
राहु काल, यमगंड और गुलिक परंपरा में नए शुभ कार्य के आरंभ के लिए टाले जाने वाले काल हैं — रोज़ के काम के लिए डरने का कारण नहीं।
चौघड़िया
दिन
- काल(वर्जित (परंपरा))06:27 – 07:59
- शुभ(शुभ)07:59 – 09:32
- रोग(वर्जित (परंपरा))09:32 – 11:05
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))11:05 – 12:37
- चर(सामान्य)12:37 – 14:10
- लाभ(शुभ)14:10 – 15:43
- अमृत(शुभ)15:43 – 17:15
- काल(वर्जित (परंपरा))17:15 – 18:48
रात
- लाभ(शुभ)18:48 – 20:15
- उद्वेग(वर्जित (परंपरा))20:15 – 21:43
- शुभ(शुभ)21:43 – 23:10
- अमृत(शुभ)23:10 – 00:37 (4 अप्रैल)
- चर(सामान्य)00:37 (4 अप्रैल) – 02:04 (4 अप्रैल)
- रोग(वर्जित (परंपरा))02:04 (4 अप्रैल) – 03:32 (4 अप्रैल)
- काल(वर्जित (परंपरा))03:32 (4 अप्रैल) – 04:59 (4 अप्रैल)
- लाभ(शुभ)04:59 (4 अप्रैल) – 06:26 (4 अप्रैल)
पुस्तक: पंचांग स्थान, सूर्योदय, समय-क्षेत्र और अयनांश पर निर्भर है — संस्कार, पर्व या मुहूर्त के लिए प्रकाशित स्थानीय पंचांग से समय सत्यापित करें।
निरयन लाहिड़ी अयनांश; सूर्योदय-सूर्यास्त सूर्य-बिंब के ऊपरी किनारे से, वायुमंडलीय अपवर्तन सहित। प्रकाशित पंचांगों से 1–2 मिनट का अंतर संभव।
पुस्तक में:विस्तार 4 · पंचांग, तिथि, योग और करण · पृष्ठ 123
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